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कम सुनने वाले दिव्यांगों को 6 लाख लाख रूपये लागत की निःशुल्क लगाई जाएगी मशीन

■ सामान्य रूप से होने वाली बातों को न सुन पाना

■ दूसरे व्यक्ति को ऊंचा, स्पष्ट बोलने के लिए कहना

■ बातचीत के दौरान बातों को फिर से दोहराने को कहना

■ सामान्य से अधिक आवाज में संगीत सुनना, टी.वी देखना

मऊ। जिला चिकित्सालय पर जन्म से 5 वर्ष के लिए ऐसे बच्चे जिन्हें कान से सुनाई नहीं देता है ऐसे बच्चों का ऑपरेशन के माध्यम से उच्च तकनीक की सुनने वाली मशीन जिसकी कीमत सामान्य बाजार में रुपये छः लाख है उसे उन लाभार्थियों को निःशुल्क लगाने के लिए 10 अगस्त शनिवार को एक दिवसीय परीक्षण शिविर का आयोजन चिकित्सा विभाग मऊ के सहयोग से किया जा रहा है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सतीशचन्द्र सिंह ने बताया कि श्रवण बाधित बच्चे कई कारणों से अपनी सुनने की योग्यता को खो सकते है। इसमें सामान्यतः जन्मजात कारण और बाद के समय में होने वाले अन्य कारण भी शामिल है। श्रवण बाधित बच्चे देखने में सभी आम बच्चों की तरह ही होते है। उनके साथ रहने पर भी आप कोई खास अंतर नहीं बता सकते है। जब तक की श्रवण बाधित बच्चा आपसे बातचीत न करें। क्योंकि बातचीत के समय श्रवण बाधित बच्चों के द्वारा बात को ठीक प्रकार से न समझना, आपसे दोबारा या अपनी बात को ऊंचा बोलने के लिए कहना जैसे लक्षण इस तथ्य की ओर संकेत करते है की बच्चा श्रवण बधिरता से पीड़ित है। जिनके फलस्वरूप कोई बच्चा अपने आस पास की आवाजों की ठीक प्रकार से नहीं सुन सकता है और श्रवण क्षमता में कुछ कमी का अनुभव करता है।

आरबीएसके के डीआईईसी मैनेजर अरविंद वर्मा ने बताया कि इस कैंप में आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए भी चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था की गई है। इसके लिए कैंप कार्ड के साथ उपस्थित होना अनिवार्य है। यह सुबह 9:00 बजे से शाम के 5:00 बजे तक चिकित्सकों के देखरेख में चलेगा इस योजना को डॉ एस. एन. मल्होत्रा मेमोरियल ईएनटी फाउंडेशन कानपुर द्वारा सहयोग दिया जा रहा है। दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग उत्तर प्रदेश लखनऊ द्वारा संचालित होगा।

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