तभी सांसदी जीतोगे तुम 70 घोसी का नेता जी
मेरी कलम से…
आनन्द कुमार
बहुतेरे लगे रहे कांग्रेस के दरबार में,
घोसी से टिकट मिले उन्हें 19 के तकरार में।
बुरे दिन जब रहे कांग्रेस के जिंदाबाद करते रहे,
आया जब मौका टिकट का तो चुपचाप सब सहते रहे।
साथ छोड़ हाथी का जब बालकृष्ण ने थामा हाथ कांग्रेस का,
जयकारे के साथ सभी कांग्रेसी स्वागत उनकी करते रहे।
दो गुट में बिखरी कांग्रेस को दस जनपथ का आदेश मानना होगा,
तन मन से लग कर उनको अब चौहान जिंदाबाद करना होगा।
बाल कृष्ण के प्रत्याशी बनने से खेल बिगड़ना तय है,
बड़े-बड़े सुरमाओं का अब सिट्टी पिट्टी गुम है।
मुद्दा भी है गर्म घोसी में लोकल बनाम में बाहरी का,
ऐसे में बसपा-भाजपा को इस मुद्दे पर सोचना होगा।
बाल ‘कृष्ण’ जो समझा इनको भूल बड़ी भारी होगी,
महाभारत के रण का ‘कृष्ण’ जो समझा, उसकी ही घोसी से यारी होगी।
कहे जो आनन्द बात समझ में, आ जाए गर नेताजी,
तभी सांसदी जीतोगे तुम 70 घोसी का नेता जी।

