शब्द मसीहा की कहानी : शादी तो उसी से की थी
“सर ! किसानों की समस्या पर कुछ कहेंगे आप ?” पत्रकार ने पूछा .
“हमारे किसान अनपढ़ है . उन्हें खेती के नए तरीके अपनाने चाहिए . नई चीजें जानेंगे तो महारत हासिल हो जायेगी .”
“जी , ट्रेनिंग और शिक्षा तो सैनिकों भी दी जाती है . उस पर कुछ कहना चाहेंगे ?”
“देखिये वे राष्ट्रवादी लोग हैं . उनकी शहादत से ही देश महफूज है .”
“आप मेरा सवाल समझे नहीं सर ….मैं शिक्षा और ट्रेनिंग की बात कर रही हूँ .”
“बंद कीजिये आप ऐसे सवाल . कुछ और पूछिए . आप विकास के मुद्दे पर बात कीजिये . हमने कितना विकास किया है . कहीं ऐसा तो नहीं कि आप दूसरे पक्ष के चैनल से हैं और हमारी रणनीति जानना चाहतीं हैं ? याद रखिये प्रचार के लिए हमारे पास भी कम चैनल नहीं हैं . हम खाते-पीते, उठते -बैठते , सोचते-देखते सिर्फ राष्ट्रवाद की बात लोगों तक पहुंचा रहे हैं . किसान और जवान भला कोई राष्ट्रीय मुद्दा है ?”
“सर ! शिक्षा और स्वास्थ्य के विषय में कुछ कहना चाहेंगे ?”
“भाई ! इतनी सफाई क्या पहले कभी हुई है …हमने विरोध को ही साफ़ कर दिया है और देश के स्वास्थ्य के जरुरी है कि किसान, जवान से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद पर चर्चा की जाय .”
“अच्छा सर ! वो जो पागल महिला का रेप हुआ आपके इलाके में उस विषय में तो जरुर आप कुछ कहेंगे ?”
“देखिये राम जी का मंदिर बनेगा तब ही राम राज्य आयेगा . आप लोगों को भी सहयोग करना चाहिए . ये विपक्षी हर विकास में सिर्फ टांग ही अडाते हैं .”
“अच्छा …अगर आपको सरकार में कोई अहम् पद मिलेगा तो आप कौन-सा विभाग लेना चाहेंगे ?”
“विदेश विभाग .”
“ऐसा क्यों ?”
“इस बहाने से हम बाहर घूमकर नई चीजें सीखेंगे और देश में लागू करेंगे .”
“पर सूना है कि आप अंग्रेजी नहीं जानते हैं …तब कैसे समझ सकेंगे ये सब ?”
“हा हा हा …इतने सारे पढ़े-लिखे घूम रहे हैं . किसी को नौकरी पर रखेंगे जिसकी राष्ट्रवादी सोच हो .”
“आपके बेटे को क्यों नहीं ?”
“हम परिवारवाद में विश्वास नहीं करते. रोजगार तो किसी और को ही देंगे .”
“क्या ये बात सच है कि आपके पिता परचून की दुकान चलाते थे ?”
“हा हा हा …लोग हमारी तरक्की से जलते हैं . अब कोई मॉल को दुकान कहे तो हम इस पर क्या कह सकते हैं .”
“जी , पिछले चुनाव में आपने घोषणा की थी कि आपके पास सिर्फ साठ लाख रुपये हैं . इस बार आपने पचास करोड़ की संपत्ति दिखाई है . यह धन कहाँ से आया ?”
“हम पर लक्ष्मी जी की कृपा है . सनातनी संस्कृति में विश्वास करते हैं…सब माँ की कृपा है .”
“जी , और आपकी माता जी जो वृद्धाश्रम में हैं , क्या उन को आप घर लायेंगे ?”
“वो हमारे पिता जी तीसरी पत्नी हैं . हम पहली पत्नी से हैं . अब ईश्वर ने असमय उनके बेटों को छिन लिया तो यह तो प्रभु इच्छा ही है . कर्मों का फल तो भगवान् श्री कृष्ण ने कहा है कि भुगतना ही होता है .”
“तब जो आपकी पहली पत्नी आपके खिलाफ निर्दलीय खड़ी हो रहीं हैं उनके लिए आप शुभकामना देना चाहेंगे .”
“सठिया गई है …हम से क्या मुकाबला करेगी . हमारे तीन महिला सुधार और सहायता केंद्र चलते हैं . हम वादा करते हैं कि हारने के बाद वे वहाँ रह सकती हैं .”
“पर उन्हीं के कारण तो उन्होंने परिवार छोड़ा था . सुना है आप किसी और को घर ले आये थे .”
“पर शादी तो उसी से की थी न .” और वे उठकर चले गए इंटरव्यू से .
शब्द मसीहा

