खास-मेहमान

मुम्बई में “मऊ वाले बृजेश भैया बेघरों के लिए भगवान से कम नहीं”

मुम्बई में बेघरों की लड़ाई लड़ रहा मऊ का ‘योद्धा’

(विजय कुमार गुप्ता)

मऊ जनपद के घोसी का रहने वाला एक ऐसा शख्स जो मुम्बई में बेघरों की आवाज बुलंद कर रहा है। जो काम सरकारें नहीं कर कर पाई उसे वो पहचान नामक संस्था के जरिये साकार करने में लगा है। अपने जिद, जज्बा और जुनून से लाखों बेघरों के लिए लड़ाई लड़ने वाले शख्स का नाम है बृजेश आर्य। बृजेश ने बनारस में काशी विद्यापीठ सोशल वर्क की डिग्री ली। डिग्री लेने के बाद समाज सेवा का संकल्प लेने वाले बृजेश ने अपनी कर्मभूमि मुम्बई को बनाया। नियति नेक थी तो मुम्बई ने भी बृजेश को ‘अपनाने’ में देर नहीं की। 12 साल में मुम्बई जैसे शहर में बेघरों की उम्मीद का वो दूसरा नाम बन गया है। बेघरों की लड़ाई लड़ते-लड़ते बृजेश अब बेघरों के लिए किसी फरिश्ते से कम नहीं है। उसने बेघरों को घर दिलाने की जो आवाज बुलंद की थी ….वो अब महाराष्ट्र सरकार के चौखट पर पहुंची है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के साथ बृजेश आर्य की एक मीटिंग हुई जिसमें बेघर लोगों को घर मुहैया कराने पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने पूर्वांचल के इस शख्स के जुनून पर सकारात्मक भरोसा दिया है।
बृजेश उनकी लड़ाई लड़ रहा है..जो पूंजीपतियों की दुनिया में गरीबी से अभिशप्त हैं । महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस से मुलाकात की ये तस्वीर भविष्य की कई कहानियों को समेटे हुए हैं। इस कहानी में सारे किरदार ‘बेघर’ हैं। जिनके सिर पर छत मयस्सर कराने का बीड़ा बृजेश आर्य ने उठाया है । पूर्वांचल के मऊ जिले के रहने वाले इस लाल ने जो मुहिम शुरू की है उसके सार्थक होने की कामना के साथ नाज कर रहे हैं । लोग कह रहे हैं बृजेश जैसे युवा समाज की जरूरत है। उनके जज्बे को सलाम। मऊ, पूर्वांचल सहित समूूूचा उत्तर प्रदेश को बृजेश के जज्बे व जुनून पर नाज है। उम्मीद ही नहींं विश्वास है कि उन्होंने अपने बुलन्द हौंसलों की बदौलत जो सफर तय किया है, एक दिन राष्ट्रीय क्षितिज पर मऊ का एक-एक शख्स गौरवांवित होगा। “अपना-मऊ” की समस्त टीम व मऊ के हर एक अवाम की तरफ से बृजेश को सलाम व बधाई।

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