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क्षय रोगी दवा जरूर लें, लॉक डाउन में भी क्षय रोगियों को मिलती रहेगी सेवाएं

■ केवल आईडी, मोबाईल नं और जरूरी जानकारी नोट कराना है जरूरी

■ प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने सीएमओ को दिये खास दिशा-निर्देश

मऊ। कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए किये गए लॉक डाउन के दौरान भी क्षय रोगियों के उपचार को निर्बाध रूप से जारी रखने के जरुरी निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा है कि क्षय रोग निवारण सम्बन्धी सुविधाओं को निरंतर जारी रखना बहुत ही जरूरी है ताकि क्षय रोग से होने वाली जटिलताओं व मृत्यु पर नियंत्रण रखा जा सके।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ सतीशचन्द्र सिंह ने बताया कि प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के पत्र में आदेशित किया गया है कि लॉक डाउन की स्थिति को देखते हुए सभी क्षय रोगियों को एक-एक महीने की दवा दे दी जाए। दवा का सेवन सुनिश्चित करने और दवा के एडवर्स ड्रग रिएक्शन पर नजर रखने के लिए निरंतर फोन कॉल/व्हाट्सएप/वीडियो कॉल के जरिये संपर्क रखें। उपचारित क्षय रोगियों को फालो-अप भी करे। संदिग्ध क्षय रोगियों की जांच सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर कराई जाये। सभी माइक्रोस्कोपी सेंटर, सीबीनाट प्रयोगशाला और कल्चर एंड डीएसटी लैब का काम चालू रखने के लिये कहा गया है। साथ में सैम्पल कलेक्शन, हैंडलिंग व सैम्पल ट्रांसपोर्टेशन के लिए सभी मानकों का पालन किया जाए।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ एसपी अग्रवाल ने बताया कि किसी भी जनपद का कोई भी क्षय रोगी जो लॉक डाउन में है वह अपने किसी भी निकटतम सेन्टरों पर पहुच कर केवल अपनी आईडी डिटेल व मोबाईल नम्बर नोट करा कर दवा प्राप्त कर सकता है। इलाज के दौरान निक्षय पोषण योजना के तहत हर माह मिलने वाली 500 रूपये उनके बैंक खाते में भेजी जा रही है। सभी सूचनाओं को निक्षय पोर्टल और निक्षय औषधि पोर्टल पर निरंतर अपडेट किया जारहा है। सभी सेन्टरों को सुनिश्चित कर दिया गया है कि लाकडाउन के दौरान क्षय रोग के औषधियों की कोई कमी न होने पाए उसे पर्याप्त मात्रा में रखें। इस पर भी नजर रखा गया है कि निजी क्षेत्र से इलाज करा रहे रोगियों की भी सेवाएं भी निर्बाध रूप से चलती रहें। उन्होंने ने आगे बताया कि मास्क का प्रयोग, हाथ धोने, हैण्ड सेनेटाइजर, सोशल डिस्टेंशिंग और बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुसार हो रहा है। प्रयोगशाला में मानक के अनुसार जाँच किया जा रहा है। कोविड-19 वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए भी सभी मानकों का सख्ती से पालन किया जा रहा है।
डॉ अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2019-20 में अब तक लगभग 2500 पॉज़िटिव टीबी के मरीज हैं जिसमें से लगभग 1800 मरीजों को उनके खाते में निक्षय पोषण योजना के तहत डीबीटी के माध्यम से हर माह 500 रुपये का लाभ पहुंचाया जा चुका है।

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