शारदा नारायण अस्पताल के डॉ. राहुल ने युवक के कई हिस्सों में कटे हाथ का किया सफल ऑपरेशन
■ टीम के सहयोग से मिली यह सफलता:डा. संजय सिंह
मऊ। कहते हैं डाक्टर भगवान का दूसरा रुप होता हैं और उसी रुप को अपनाते हुए मऊ जनपद के चर्चित शारदा नारायाण अस्पताल के चिकित्सक डा. राहुल ने कर दिखाया है। डा. राहुल ने एक ऐसे मरीज का इलाज किया है जो हलधरपुर क्षेत्र के गांव जमीन शहरूल्लाह में मरीज रामलखन का एक हाथ थ्रेसर में गेहूं मड़ाई करते समय फंस कर कई भागों में कट गया था और परिजन अपने बेटे के इलाज के लिए जनपद के कई मशहूर अस्पतालों में गये लेकिन उन डाक्टरों ने अपना फर्ज निभाने के बजाये उन्हें सीधे भर्ती लेने और इलाज करने से मना कर दिया। सारे जगह से थक हारकर परिजन निराश होकर शारदा नारायण अस्पताल पहुंचे, जहां उन्हें निराश से एक उम्मीद की रोशनी मिली। डा. संजय ने जब युवक की हालत देखा तो उन्होंने तत्काल अपने अस्पताल में भर्ती कर लिया और तत्काल इलाज के लिए और आॅर्थाे सर्जरी के विशेषज्ञ डा. राहुल कुमार को हाथ को रि-इंप्लांट करने की जिम्मेदारी सौंपा जहां शारदा नारायन हास्पिटल के डॉक्टरों की एक टीम ने लगभग पांच घंटे की सर्जरी के बाद मजदूर के दाएं हाथ को सफलतापूर्वक रि-इंप्लांट कर दिया और कटे हुए हिस्से को प्रारंभिक रूप से तैयार करने के बाद उसे फिर से जोड़ने का काम शुरू हुआ। जिसके बाद सभी नसों और सिराओं को आपस में जोड़ने के साथ-साथ सभी क्षतिग्रस्त हिस्सों को रिपेयर किया गया। स्पेशल नेल का इस्तेमाल कर कलाई के सभी नर्व को हड्डी के साथ फिक्स किया गया। इस सफलता से डाक्टरों सहित परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। वहीं शारदा नारायन हास्पिटल के डायरेक्टर डा. संजय सिंह ने बताया शारदा नारायन हॉस्पिटल में मरीज के आने कि सूचना मिलते ही आपात टीम को सक्रिय किया गया और आॅर्थाे सर्जरी के विशेषज्ञ डा. राहुल कुमार को हाथ को रि-इंप्लांट करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जिन्हें डा. राहुल व उनटी टीम ने युवक का सफल आपरेशन कर उसके हाथ को जोड़ दिया। कहा कि यह तकनीकी रूप से बहुत जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी थी, जिसे सफलतापूर्वक किया गया। सर्जरी के अंत में मूल्यांकन किया गया कि हाथ काम करेगा और रक्त के अच्छे संचरण के कारण वह गरम भी था। मरीज को तुरंत आईसीयू में रखकर इलाज शुरू कर दिया गया है। डॉ. राहुल कुमार ने बताया कि मरीज की स्थिति में सुधार है अभी हाथ की सभी उंगलियों से पल्स मिलना शुरू हो गया है। कहा कि फिजिशियन डा. संजय सिंह, क्रिटिकल केयर स्पिेश्यिलिस्ट डा. सुजीत सिंह की उपस्थिति में यह संभव हो पाया।

