हुक्का बार की आड़ में नशीले पदार्थ का सेवन कर बिगड़ रही युवा पीढ़ी
राजनैतिक दलों के आला नेता देख लो इन मुद्दों पर आपके घोषणा पत्र में तो कहीं जगह नहीं मिला, जुबानी जंग में ही इन मुद्दों को थोड़ी सी जगह दे दो, हो सकता है देश संवर जाये।
हां एक बात और हो सकता है आज तुम्हें सत्ता के नशे में चूर होने की वजह से, यह बिगड़ती पीढ़ी दिखाई न दे, लेकिन हो सकता है कल तुम्हारे कुल का कोई जब इस नशे की लत में पूरी तरह से गिरफ्त में हो जाएगा, तो तुम खुद से ही सवाल करोगे कि काश सत्ता के पक्ष व विपक्ष में रह कर हम इन मुद्दों पर कुछ किए होते।
बस इतना ही कहना चाहूँगा,
जब चिड़ियों ने चुग खेत लिया तो पछताए क्या होत है। पढ़िए एक लेखक की विशेष रिपोर्ट।
वाराणसी। समय: दोपहर के तीन बजे स्थान : रथयात्रा कुबेर कॉम्प्लेक्स के सामने अंग्रेजी शराब की दुकान 7-8 लड़के लडकिया लहराते हुए तथा मुंह छिपाते हुए अंग्रेजी शराब के दुकान की बिल्डिंग के फ्लोर से उतरकर लहराते हुए जा रहे थे। बच्चों की उम्र लगभग 13 से 19 साल थी। कुबेर कॉम्प्लेक्स स्थित एक फ़ूड स्टाल के सत्तू पराठे का मैं दीवाना हूँ। हर बार की तरह उस दिन भी मैं वही था, चूंकि अक्सर वहाँ आना जाना है तो दुकानदार से हाल चाल भी होती रहती है कल मैने अचानक से देखा कि मॉडल शॉप (शराब की दुकान) के ऊपर रेस्टोरेंट का बोर्ड लगा है परंतु रेस्टोरेंट का कोई नाम ही नही था, तो मुझे संदिग्ध लगा और तो और गूगल मैप पर मैंने सर्च किया तो कोई रेस्टोरेंट नही दिखा उस लोकेशन पर। मैने दुकानदार से पूछ ही लिया कि अंकल कुबेर के सामने कोई रेस्टोरेंट खुला है क्या ?मॉडल शॉप (शराब की दुकान) के ऊपर के फ्लोर पर। दुकानदार ने बड़े मायूसी भरे अंदाज में बोला- नही सर । ये हुक्का बार है यहां बच्चे हुक्का पीने आते है, और सर पर हाथ रख कर बोले कि कम-कम उम्र के लड़के लड़कियां ज्यादा आते है हुक्का के आड़ में नशीले पदार्थ तथा शराब इत्यादि की भी व्यवस्था यहाँ उन्हें मिल जाती है।
ज्यादातर सम्पन्न परिवारो के बच्चे आते है । यहाँ आने के बाद बच्चे इसके आदती हो जाते है फिर घर से पैसे न मिलने पर बच्चे बड़े कदम भी उठा लेते है।
विदित हो कि पिछले दिनों बनारस के लक्सा स्थित व्यापारी ने पुलिस से शिकायत की थी कि उनके 12 वर्षीय बेटे का अपहरण हुआ है साथ ही उनके यहां 5 लाख के जेवर भी गायब हुए थे। पुलिस ने बेटे को किसी होटल के बेसमेंट में बने हुक्का बार से बरामद किया वहाँ वो रात भर पार्टी कर रहा था और शायद जेवर भी उसने ही चुराए थे लेकिन परिवार वाले लोकलाज के भय से इस बात को दूसरा मोड़ देना चाह रहे थे । दरअसल शहर भर में इस तरह नशे के अड्डो का भरमार हो चुका है। बड़े बड़े कॉम्प्लेक्स के बेसमेंट इत्यादि में ऐसे ही नशे के अड्डे संचालित हो रहे है फिल्मी स्टाइल में रंगीन लाइट, डीजे साथ मे आप स्नूकर से जुवा भी खेल सकते है। अय्याशी की पूरी व्यवस्था इनके यहाँ होती है । न जाने क्यों पुलिस और आला अधिकारी इन सारी चीजों को नजरअंदाज कर रहे है। अभिभावकों से अपील है कि वो अपने बच्चों पर कड़ी नजर रखे, मासूम बच्चों को इनमें संलिप्त होने से बचाएं । हर बार प्रशासन पर ही सारा ठीकरा न फोड़े। कुछ उन अभिभावकों की भी गलती है जो बच्चों को आवश्यकता से अधिक पैसे देते है, और उन पैसों के खर्च का ब्यौरा नही लेते है साथ ही टीन एज के बच्चों की संगति एवम उनके कार्यो पर नजर रखे उनसे मित्र जैसा व्यवहार रखे तर्को के साथ उनके भावनाओ को आहत किये बगैर उनकी समस्याओं का निवारण करे। बाकी सब ऊपरवाले की मर्जी है। देखना यह है प्रशासन की नींद कब टूटती है? बड़े बड़े नेताओं के लड़कों द्वारा संचालित इन बारो पर पुलिस आखिर कब कार्यवाही करेगी।
फोटो : इंटरनेट से एक हुक्का बार का है।

