चर्चा में

लाशों का मेला…सजी चिताओं की आग बनती जा रही हैं…

◆जहाँ आदमी आदमी को जला रहा है

(श्मशानघाट से अरविंद सिंह)

गाजीपुर गंगा की रेती पर बना बैंकुठ धाम या श्मशान घाट या सजती चिताओं का मेला… बढ़ता ही जा रहा है।हमारे गांव रामपुर की मृतका की लाश लेकर जब हम श्मशान घाट पर पहुँचे तो हमारे सामने बस एक लाश थी। डोमराजा को आग का कर देने के बाद सुबास के साथ जब ग्रामीणों ने चिता सजाने की लकडी लाने बढ़े ही थे कि एक लाश की गाड़ी आयी,हम लकड़ी लेकर थोडा़ और आगे बढ़े तो देखा दो और लाश आ गयी। चिता सजते सजते देखा सात लाशे अगल बगल। और जब चिता की आग लगने लगी तो देखा 12से अधिक लाशों की चिताएं सज रही हैं। यहाँ लाशों को देखने से प्रतीत होता है कि बच्चा,बुजुर्ग और महिला सभी तरह की लाशों का मेला लगता जा रहा है। मानो पूरा संसार यही आता जा रहा है। सभी मरते जा रहें हैं। सभी खतम होते जा रहे हैं। चिता की आग धहकती और धधकती जा रही है और सभी को समान और निस्पृह भाव से अपने आगोश में लेती जा रही है। सभी मरते और खपते जा रहे हैं। इसी के साथ माया-मोह,तिष्णा और आसक्ति भी चिता की आग में जलती जा रही है। सभी अपने हाथों से अपनों को जलाते जा रहे हैं। बेटे को बाप त़ो बाप को बेटा,पत्नी को पति जलाता जा रहा है। अपने ही हाथों से अपने सबसे प्रिय को चिता बनाते जा रहे हैं और उसी सजी चिता को डोमराजा के दिए आग में जलाते जा रहे हैं। यह क्रम निर्बाध ही चलता जा रहा है।
यह रंगीन और हसीन दुनिया,यह मायानगरी देखते ही देखते चिता की आग मे धू धू कर जलती जा रही है। सभी पहले लाश,फिर चिता और फिर राख में बदलते जा रहें हैं। यहाँ कोई शोर नहीं है,यहाँ कोई रूदन नहीं है,यहाँ कोई विलाप नहीं है ,बल्कि यहाँ स्थायी स्तब्धता और निरवता पसरी है। यहाँ चिता की आग में जलती अंहकार,वैभव और विलासिता है। यहाँ दुनियाबी सच्चाईयो का हस्र और अंतिम ब्रह्मज्ञान है। कि यहाँ शरीर के शव बनने की यात्रा का अंतिम पड़ाव है। यहाँ पंचभूतों से बनी शरीर का पुनः पंचभूतों में मिलन का उत्सव है। हाथ में खजनी लिए निर्गुण गाते एक रामनामी संत का दर्शंन कि ”एक दिन जइबा तु अकेला तोहका यार ना मिली..। तु बोइबा बबूल त अनार ना मिली…।” सुनते सुनते जब तक ब्रह्मज्ञान की पराकाष्ठा तक पहुँचते,ख़बर मिली चिता की लाश राख बन चुकी है और वह राख गंगा में बिलीन हो चुकी है। जिस शरीर को इतने बरस तक कंचन काया बनाया था,डेढ़ घंटे में चिता की अग्नि ने राख में बदल दिया।
#तत्वज्ञान

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं शार्प रिपोर्टर मैगजीन के संपादक हैं)

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