11 दिसम्बर को डाक्टर्स हड़ताल पर, इमरजेंसी न हो तो न जाए अस्पताल
(आनन्द कुमार)
मऊ। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ब्रांच मऊ द्वारा जन जागरण हेतु राष्ट्र व्यापी स्तर पर जारी अपने संगठन के फरमान को जनहित में मऊ की जनता के लिए जारी करते हुए सहयोग की अपील की। आईएमए मऊ के जिलाध्यक्ष डा. पीएल गुप्ता ने कहा कि आम जनता के हित में स्वास्थ्य सेवाओं के रूप में जो निर्णय सुना रही है वह गलत है। सरकार को अपने निर्णय पर विचार करना चाहिए। क्योंकि जटिल कार्यों के लिए प्रशिक्षित एवं योग्य चिकित्सकों का होना अति आवश्यक है। सरकार का यह निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है। डॉक्टर पी एल गुप्ता नेे बताया आईएमए केे राष्ट्रव्यापी आह्वान पर पूरे देश के आईएमए के चिकित्सक सुबह 6:00 बजे से हड़ताल पर रहेंगे। कोई भी चिकित्सक चिकित्सीय कार्य नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि केवल इमरजेंसी एवं कोविड-19 से संबंधित मरीज को ही चिकित्सक देखेंगे। उन्होंने सरकार के फैसले के खिलाफ आइएमए के आंदोलन एवं बंदी को सफल बनाने के लिए आम जनता से अपील की और कहा कि कृपया जनता सरकार के फैसले के विरुद्ध आईएमए की आवाज बने।
वही आईएमए के महासचिव सीएस साहनी ने कहा कि सरकार मेडिकल के कार्यों में योग्य और अयोग्य का जो निर्धारण कर रही है वह गलत है। सरकार को अपने फैसले पर सोचना होगा। श्री साहनी ने कहा कि आई एम ए मऊ सरकार केेेेेेे गलत फैसले के विरोध में राष्ट्रीय नेतृत्व के दिशा निर्देश पर आंदोलन का रूप रेखा तय कर चुकी है। उन्होंनेे आम जनता से आन्दोलन में सहयोग की अपील की।
जानिए क्या है पूरा मामला…
सरकार ने देश मे प्रशिक्षित चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिये एक दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय के द्वारा अप्रशिक्षित डॉक्टरों को कुछ अतिजटिल ऑपेरशन तक करने की अनुमति दे दी है। सरकार ने गरीब जनता की जान की कीमत कम आंकते हुए उन्हें ” गिनी पिग “ जैसा प्रयोगशाला का जंतु समझ लिया है और उनके इलाज के लिए बगैर सर्जरी विधा का समुचित प्रशिक्षण लिये हुए BAMS चिकित्सकों को भी कई जटिल सर्जरी करने की अनुमति प्रदान की गई है ।
इसके दूरगामी दुष्परिणाम अत्यंत भयावह होंगे। एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति से MBBS व MD के कठिन प्रशिक्षण के बाद भी एलोपैथिक चिकित्सकों को जिन जटिल चिकित्सा प्रक्रियाओं को करने की अनुमति नहीं है , उन प्रक्रियाओं को बिना समुचित प्रशिक्षण के आयुष चिकित्सकों को करने की अनुमति प्रदान करना सामान्य जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ करने जैसा ही है ।
चिकित्सा की हर विधा का अपना अलग तकनीकी ज्ञान है और सभी का लक्ष्य मानव स्वास्थ्य की रक्षा करना ही है , मगर अधकचरे ज्ञान व एक पैथी की पढ़ाई करके दूसरी पैथी की प्रैक्टिस करने की अनुमति देना ( MIXOPATHY – आयुर्विज्ञान की खिचड़ी ) एक बेहद खतरनाक कदम है और पूरे विश्व मे ऐसा करने की अनुमति किसी भी देश मे नहीं है ।
देश मे चिकित्सकों की कमी को फौरी तौर पर अल्पप्राशिक्षितों को जटिल ऑपरेशन करने की अनुमति मात्र दे देने से पूरा नहीं किया जा सकता है । ऐसा करने से हर चिकित्सा पद्धति का विनाश ही होगा।
आज जरूरत है कि आयुर्विज्ञान की सभी विधाओं (आयुर्वेद , यूनानी , होमियोपैथी , एलोपैथी) के उच्चीकृत व आधुनिक अनुसंधान केन्द्र स्थापित किये जायें ताकि चिकित्सा की हर विधा का तेज़ी से विकास हो , जिससे देश की स्वास्थ्य सेवाओं का उन्नयन हो , न कि हर अल्पप्रशिक्षित को जटिल प्रक्रियाओं को करने की अनुमति मात्र देकर कागज़ी खानापूर्ति की जाए और गरीब जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जाये ।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भारत सरकार के MIXOPATHY (आयुर्विज्ञान विधाओं की खिचड़ी ) लागू करने के हर उस कदम का विरोध करती है जिससे देश की स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर में गिरावट आये और विश्व मे भारतीय चिकित्सकों की छवि को नुकसान पहुंचे ।
जय हिंद
LONG LIVE IMA
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