रचनाकार

हाय! महामारी ये कैसी भारत को बेहाल किये, बेटा डरता माँ बच जाए माँ दोहराती “लाल जिये”

( ओमा द अक्क )

आओ बच्चों तुम्हे दिखाएं
झाँकी हिंदुस्तान की
यहाँ का राजा बेसुध बैठा
बनी है जन के जान की
वन्दे मातरम
वन्दे मातरम!

हाय! महामारी ये कैसी
भारत को बेहाल किये
बेटा डरता माँ बच जाए
माँ दोहराती “लाल जिये”
चारो तरफ तड़पते रोगी
चारो तरफ दहलते लोग
आधी मौत ख़ौफ़ से होती
आधे को डसता यह रोग
यहाँ ब्लैक में बिकती सांसें
जली चिता अरमान की/
यहाँ का राजा बेसुध बैठा
बनी है जन के जान की
वन्दे मातरम
वन्दे मातरम!

बड़े बड़े दावे थे जिनके
अच्छे दिन ले आंएगे
घर घर मे रुपयों की बारिश
घी के दिये जलाएंगे
किसे पता था वही एक दिन
घर मे आग लगाएंगे
नोट फूक देंगे उनका ही
जिनके वोट वो पाएंगे
धंधा-पानी चौपट करके
बात करें सम्मान की/
यहाँ का राजा बेसुध बैठा
बनी है जन के जान की
वन्दे मातरम
वन्दे मातरम!

कल तक रोटी की चिंता थी
आज तो सांसें भरने की
आँखों आँखों ख़बर टहलती
इसके उसके मरने की
अर्थी को काँधे के लाले
मातम किसका कौन करे
हाय!अभागे! राज में तेरे
पता नहीं कब कौन मरे/
जो कुछ कवि ने कहा सत्य है
बात नहीं अपमान की/
यहाँ का राजा बेसुध बैठा
बनी है जन के जान की
वन्दे मातरम
वन्दे मातरम!

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