सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर Online कवि सम्मेलन का Live आयोजन
◆ 07 राज्यों के एक दर्जन से अधिक कवियों ने भारत के अमर सपूत सुभाष चन्द्र बोस को किया नमन्
चिरैयाकोट (मऊ), स्थानीय नगर से साहित्यिक संस्था बज़्म-ए-अंदाज़-ए-बयाँ द्वारा शनिवार की शाम को नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की 125 वीं जयंती के शुभ अवसर पर ऑनलाइन लाईव कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें 7 राज्यों के एक दर्जन से अधिक कवियों ने भारत के अमर सपूत सुभाष चन्द्र बोस को नमन करते हुए काव्य पाठ कर आयोजन को शिखर तक पहुंचाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अरूण शर्मा तथा संचालन गीतकार अश्क चिरैयाकोटी ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ लखनऊ की कवियित्री कविता गुप्ता “काव्या” की सरस्वती वंदना से हुआ। उसके बाद कुशीनगर के कृष्णा श्रीवास्तव ने नेताजी की याद में – आजादी की जंग में,भरा हिन्द में जोश। नमन जयंती पर करे,भारत तुमको बोस।। सुनाकर समां बांध दिया। उसके बाद लखनऊ के वरिष्ठ ग़ज़लकार जितेंद्र पाल सिंह “दीप” ने- वतन की उनको आज़ादी अग़र प्यारी नहीं होती,
शहीदों ने कभी फ़िर जान यूँ वारी नहीं होती।। सुनाकर शहीदों को नमन किया। तत्पश्चात गोण्डा से विनीता सिंह “विनी” ने – हिंद की आन-बान की खातिर, अपने सर को हम कटा देंगे।। सुनाकर लोगों में जोश भर दिया। वहीं प्रयागराज से सिम्पल “काव्यधारा”ने अपने दोहे – सोने की चिड़िया लगे , मेरा हिन्दुस्तान।
भारत माँ के वीर सब , होते बहुत महान।। से भारत की गरिमा को रेखांकित किया। तत्पश्चात कासगंज से शायरा रेनू सोलंकी ने अपनी ग़ज़ल- चलो देखें मुहब्बत का सफ़र कितना सुहाना है।सुना है मुब्तिला इसमें हुआ सारा ज़माना है।। सुनाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया। उसके बाद रामपुर से रागिनी गर्ग ने – कहे कहानी शौर्य की,सारा हिंदुस्तान।भारत में पैदा हुए, ऐसे वीर महान।।सुनाकर भारत की शौर्य गाथा को रेखांकित किया। वहीं झारखण्ड के वरिष्ठ कवि राजमणि “राज” की पंक्तियों- दिले-अरमान हम अपने सजाकर देखेंगे। वफ़ा की राह में खुद को मिटाकर देखेंगे।। को लोगों ने खूब सराहा। वहीं चंडीगढ़ से मनोरमा श्रीवास्तव ने- अदब-ओ-लिहाज़ दिल से निकलता चला गया।इन्सान जानवर में बदलता चला गया।। सुनाकर लोगों को वर्तमान हालात पर सोचने पर विवश कर दिया। तत्पश्चात बिहार के युवा शायर आयुष कश्यप की ग़ज़ल- गर सुभाष ओ चंद्रशेखर सी जवानी चाहिए। क़ल्ब में भी हौसला फिर आसमानी चाहिए।। ने लोगों में जोश भर दिया। तत्पश्चात कविता गुप्ता “काव्या”ने आज के हालात पर कटाक्ष करते हुए कहा कि- कहो कैसे लिखूँ मैं गीत रूठे भाव हैं अब तो।समाई स्वार्थ की स्याही तिरोहित चाव हैं अब तो।। उसके बाद पंजाब से सुप्रसिद्ध कवि एवं जादूगर रमेश विनोदी ने अपनी कविता – स्व भूमि रज पखारण कर,विजयी घोष उच्चारण कर,धर माथे पर कालकूट को,धरा क्लेद निवारण कर,अस्तित्व समर में हे पार्थ,रण कर, रण कर, रण कर ।। से गीता के उपदेश को रेखांकित किया। वहीं कार्यक्रम के संयोजक अश्क चिरैयाकोटी ने- अपने वतन की आन पे जो सर कटा ग्रे।जौहर वतन परस्ती का अपने दिखा गये।।सुनाकर नेताजी तथा शहीदों को नमन किया।अंत में मध्य प्रदेश से अरूण शर्मा ने सुमधुर गीत- मन करता है सुंदरता पर गीत मनोहर मैं गाऊँ, प्रीत चाशनी में डूबे कुछ शब्द आप तक पहुंचाऊँ।। सुनाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।


बहुत शानदार कल सुभाषचंद्र बोस जी जयंती पर बहुत शानदार रहा कवि सम्मेलन ऐसी बयार बही ,सब जोश से भर गए ।