महान साहित्य साधक डा. रतिभानु सिंह नाहर पंचतत्व में विलीन,
■ सर्वेश्वरी मुक्तिधाम ढेकुलियाघाट पर हुआ अंतिम संस्कार, पौत्र ने दी मुखाग्नि
मऊ । बाबा नागार्जुन, महाप्राण निराला, धर्मवीर भारती, महादेवी वर्मा, पूर्व राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री जैसे समकालीन साहित्यकारों के बीच अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले डा. रतिभानु सिंह नाहर सबके दुलरुआ थे। उनके पुत्र समाजसेवी राजकुमार सिंह राजा का जन्म प्रयागराज में धर्मवीर भारती जी के उस भवन में हुआ जिसे नाहर जी ने खरीद लिया था। जब वह एमए में पढ़ने के दौरान अपनी कक्षा में पहुंचे तो पाठ्यक्रम में सम्मिलित उनकी रचना को उन्हें ही पढ़ाया गया। 95 वर्ष की अवस्था में उन्होंने शुक्रवार की सुबह 7:30 बजे अंतिम साँस ली। मऊ नगर के तमसा तट के ऐसे अजस्र साहित्य साधक को मुक्तिधाम पर श्रद्धांजलि देने वालों में पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष अरविंद सिंह, पुरुषार्थ सिंह, प्रवीण राय सहित जनपद के साहित्यकारों व समाजसेवियों ने शोक प्रकट किया। उनके निधन का समाचार सुनते ही जनपद के साहित्य प्रेमियों पत्रकारों आदि में शोक का लहर छा गया । लोगों ने साहित्य जगत के मूर्धन्य विद्वान के निधन पर अपनी शोक संवेदना प्रकट किए । ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अधिवक्ता हरिद्वार राय ने कहा कि रतिभानु सिंह नाहर साहित्य जगत के वह पुरोधा थे जो कई पीढ़ियों के साहित्य जगत को अपने आंखों के सामने देखा है उनके निधन से जनपद ही नहीं बल्कि पूर्वांचल और देश में साहित्य जगत का एक हीरा खो दिया शोक संवेदना प्रकट करने वालों में प्रमुख रूप से ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के महामंत्री प्रदीप कुमार सिंह डॉ आजाद नोमानी, राहुल सिंह, वेद मिश्रा, दुर्गा किंकर सिंह, देवेंद्र मोहन सिंह, सुनील कुमार दुबे सोनू, आनन्द कुमार, कल्याण सिंह, हरिओम राय, चंदन त्रिपाठी, श्री राम जायसवाल, अखिलेश यादव, बृजराज, अशोक यादव, रामग्वाल यादव आदि रहे।


