फिर तो झूठ बोल रहे हैं कलेक्टर आजमगढ़..?
● डिप्टी कलेक्टर की गर्दन फंसती देख ईओ नगर पालिका को बलि का बकरा बनाना चाहता है जिला प्रशासन?
@ अरविंद सिंह #justice_4_journalist_dutta
जी हाँ, कलेक्टर आजमगढ़ के बयानों और ईओ नगर पालिका के बयानों को यदि मिलाया जाए तो सीधा निष्कर्ष निकलता है कि कोई तो झूठ बोल रहा है. कलेक्टर से जब पूछा गया कि आप के एसडीएम ने जब 23 मार्च को धारा -133 सीआरपीसी की नोटिस वरिष्ठ पत्रकार एस के दत्ता की पत्नी इन्दू दत्ता को रिसीव कराया, जिसमें जवाबदेही दाखिल करने के लिए 25 मार्च का दिन मुकर्रर किया गया था. तो फिर किन परिस्थितियों में 24 मार्च को ही रात के अंधेरे में स्ट्रीट लाइट बुझाकर बुलडोजर चलाया गया, और एसके दत्ता के अखबार कार्यालय को जमीदोज़ किया गया. तो डीएम स्वयं एसडीएम गौरव कुमार के बचाव में उतर आएं और आनन- फानन में अपने ट्विटर हैंडल से मुख्यमंत्री और सरकार को ट्वीट पर ट्वीट करते हुए यह बताने की कोशिश करने लगे कि यह धारा 133 सीआरपीसी की कार्रवाई की गई है और इसे उनके लाडले एसडीएम ने नहीं, बल्कि अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका परिषद ने गिराया है. जबकि ईओ का कहना है कि- ‘मैं तो घटना के दिन था ही नहीं, मैं क्यों जमीदोज़ करूंगा, जबकि नगर पालिका ने ही बीस बरस पहले बतौर किरायेदार इंदू दत्ता को उक्त भूखंड आवंटित किया था, और उनका किराया जमा था.’
मुझसे आवंटन की स्थिति पूछी गयी थी, तो मैंने लिखित रूप से भी एसडीएम और डीएम को बता दिया था कि- इसे बीस साल पहले पूर्व चेयरमैन श्रीमती माला द्विवेदी और तत्कालीन ईओ वंशराज सिंह के कार्यकाल में आंवटन किया गया था. और इसके निर्माण की शर्त के अनुसार नगर पालिका और किरायेदार के बीच एग्रीमेंट निष्पादित था. जिसमें किराएदार को केवल भूखंड का आंवटन किया गया था, जिसपर वह अपने स्तर से निर्माण कराएगा, और यह निर्माण सहित भूखंड पर नगर पालिका का स्वामित्व रहेगा. इसी के साथ निर्धारित दर पर किराया, किराएदार द्वारा नगर पालिका को नियमित जमा किया जाएगा. जोकि की जमा था.
ऐसे में आखिर कौन सी सनक सवार हो गयी कि नोटिस जारी कर किसी को सुनवाई का अवसर दिए बगैर उसके निर्माण को अवैध करार दे, उसे रात के अंधेरे में जमीदोज़ कर दिया जाए. इससे तो न्यायिक प्रक्रिया, और न्यायालय की गरिमा ही कलंकित हुई है. इससे तो एक बात साफ है कि एसडीएम और डीएम की कार्रवाई सलेक्टिव है.गरीब के लिए वे शेर बन जातें हैं और ताकत के सामने मेमना. क्योंकि ईओ के नाम जिस पत्र को जारी करते हुए डीएम द्वारा आंवटन प्रक्रिया में जवाबदेह लोगो पर कार्रवाई करने की आख्या मांगी गई है. वह वर्तमान में सत्ता दल भाजपा के प्रभावशाली लोग हैं और उनमें से एक का संबंध तो सीधे राजभवन तक है. यानी सीधे राज्यपाल स्तर का हस्तक्षेप हो सकता है. ऐसे में डीएम और एसडीएम द्वारा जिस सनक पर सवार होकर आंवटन के लिए जिम्मेदार लोगों के नामों की सूची मांगी गई, उसी रफ्तार से विधिक कार्रवाई भी करनी चाहिए थी. लेकिन एक बुजुर्ग पत्रकार की आजीविका को जमीदोज़ कर जब प्रभावशाली लोगों पर कार्रवाई की बारी आई तो हाथ पांव क्यों फूलने लगें. तब इन हाकिमों को न्यायप्रिय और हनक वाले ईमानदार नौकरशाह माना जाता जब विधि के अनुसार कार्रवाई करते, सामने वाला चाहे जितना बड़ा प्रभावशाली हो.. लेकिन सिट्टी पिट्टी अब क्यों गुम है. ..!
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‘कैसे राजभवन का नाम आते ही, यू टर्न ले रहे हैं कलेक्टर और एसडीएम..!
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