रचनाकार

दो टूक : गाइए घर घर सोहर

धीरु भाई ( धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव )

गाइए घर घर सोहर
( सात दुमदार दोहे )
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पुनः मुनादी हो रही,
देश हुआ खुशहाल।
सिसक रहा है रूपया,
लखकर अपना हाल।
कसाई विहँस रहा है।
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बढ़ा हुआ नाखून है,
काट रहा है केश।
हमसे औसत आय में,
आगे बंग्लादेश।
गाइए घर घर सोहर।
——–3——-
सच के पथ पर अब यहाँ,
राही केवल चार।
दो के कर में देश है,
दो के कर व्यापार।
शेष के पास कटोरा।
——–4——-
सात साल में बढ़ गया,
इतना हिन्दुस्तान।
दिया केन्या ने हमें,
बारह टन खाद्यान्न।
बोलिए जय विकास की।
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डीजल को मत पूछिए,
हार गया पेट्रोल।
रेस में दो के पार है,
अब सरसो का तेल।
हमारी कुशल कला से।
———6——–
हवा, दवा, सूई निरख,
भाग रहा है रोग।
साजिश करके मर रहे,
देश विरोधी लोग।
हमें बदनाम करन को।
———7——–
साथी अब मत कीजिए,
अच्छे दिन की बात।
इससे तो अच्छी रही,
बीती काली रात।
इमरजेंसी वाली भी।

  • धीरु भाई ( धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव )
    दो टूक, एक जून 2021.

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