अलविदा, नाहर साहब अलविदा : डा. जमाली
मऊ। कवि साहित्यकार एमबीबीएस चिकित्सक डॉक्टर वसीमुुुद्द्दीन जमाली ने अपने मीडियाा के फेसबुक पर कर रति भानु श्री नाहर को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लिखा है कि आह, नाहर साहब हम सब से बिछड़ गये। मशहूर साहित्यकार रति भानु सिंह नाहर साहब भी, अब हमारे बीच नहीं रहे। उन का यूँ चले जाना, केवल साहित्य जगत के लिए बहुत बड़ा नुक़सान है, बल्कि मुझे ये लगता है, कि, मेरा एक अभिभावक चला गया। नाहर साहब हमेशा नए लिखने बालों की हौसला अफ़ज़ाई करते थे। मऊ जनपद की तमाम साहित्यिक गतिविधियों की वो धुरी थे। जब भी बहुत दिनों तक कोई साहित्यिक कार्यक्रम नहीं होता, तो कहते, अरे भाई कोई कार्यक्रम होना चाहिए और फिर उस कार्यक्रम के लिए स्वयं आगे आगे चलने लगते। मुझसे तो वो बेपनाह मोहब्बत करते थे। जब भी उन से मिलने जाता और जब तक उन का स्वास्थ्य ठीक था, तब तक वो स्वयं, दरवाज़े, पर लेने चले आते, कहते ” जमाली साहब आप आ गए, बहुत ख़ुशी हुई। मैं आप को याद कर ही रहा था”। फिर काफ़ी देर तक बातें होतीं। कलकत्ता के दिनों से लेकर इलाहाबाद तक की बातें। बताते थे, की, किस प्रकार “निराला” जी अक्सर उन के घर आ कर कई कई दिन रह जाते थे और निराला जी के साथ बिताए हुए दिनों को याद कर के नाहर जी भावुक हो उठते।
लगभग एक साल पहले, मे्रे आवास पर आए। मेरे आग्रह पर काफ़ी देर तक बैठे रहे और मेरे आग्रह पर उन्हों ने अपनी बेहतरीन रचनाएं सुनाईं।कुछ महीने पहले मैं अपने बेटे सैफ़ के साथ उन से मिलने, उन के आवास पर गया। कमज़ोर ज़रूर लग रहे थे, लेकिन हौसले और याददाश्त में कोई कमी न थी। बहुत देर तक हम लोग बातें करते रहे,एक दूसरे का कलाम सुनते और सुनाते रहे।कम लोगों को मालूम होगा, कि, वो ग़ज़लें भी अच्छी लिखते थे। क्या पता था, कि ये हमारी उन से आख़री मुलाक़ात होगी।
अलविदा, नाहर साहब अलविदा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।

