खास-मेहमान

शब्द मसीहा की कहानी: अपनी अम्मा के ऊपर गई है

मालिक के खेतों से काम करके धनिया लौटा तो पाया कि घरवाली घर में नहीं है । उसने घर में खेलती बेटी से पूछा , “तेरी माँ कहाँ है बेटी ?”

“वो मेहँदी पीसने गई है ब्याह है बड़े घर वालों के यहाँ ।”

“कब लौटेगी ? कुछ बता के गई है क्या ?”

“माँ ने कहा है कि मेहँदी के बाद अगर दाल पीसने का काम मिला तो देर हो जाएगी लौटने में । पर इतना क्यों पूछ रहे हो बापू ?”

“अरे! बेटा भूख लगी है ज़ोर की , तूने तो खा लिया होगा !”

“हा हा हा …इत्ती-सी बात है । मैं देती हूँ आपको दाल-भात । ” और उसने थाली में चावल और दाल परोस दिया । पिता उसे निहारते हुए खाने लगा ।

“तेरी माँ खा के गई या नहीं । “

“हाँ , मैंने और माँ ने खा लिया है । और चाहिए तो देती हूँ तुमको , सुबह का खाया होगा न भूख तो लगेगी ही ।”

बेटी ने कहते हुए चावल और परोस दिये । परोसने के बाद बेटी की नजर देगची पर बार-बार जा रही थी । पिता का हाथ खाते हुए रुक गया । वह समझ गया कि बेटी ने नहीं खाया है । उसने कौर बेटी के मुंह में देते हुए कहा , “तू बेटी है मेरी , अपनी अम्मा के ऊपर गई है ।” और आँखों से दो बूंद भूख ढलक पड़ी।

शब्द मसीहा

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