आयुर्वेद व एलोपैथ के विवाद से दूर रहें, जिससे लाभ मिले उस विधि से इलाज कराएं : डॉ गंगा सागर सिंह
मऊ। चिकित्सा जगत में आयुर्वेद, एलोपैथ, होम्योपैथी लेकर यूनानी पैथी पद्धतिओ तक का बीमार इंसानों की सेवा मकसद होता है। एक चिकित्सक द्वारा सभी पद्धतियों के माध्यम से मानवता की सेवा ही परम धर्म होता है। जिसके लिए निसंदेह सबसे अधिक सम्मान चिकित्सकों को ही मिलता है जिन्हें धरती का देव भी कहा जाता है।
उपरोक्त बातें मऊ जनपद में वर्ष 2001 से 2004 तक लगातार तीन सत्रों में आईएमए के अध्यक्ष रह चुके व पूर्वांचल के प्रख्यात आर्थो फिजिशियन डॉ गंगा सागर सिंह ने कहा। वर्तमान में बाबा रामदेव के बयान से उपजे विवाद को लेकर उन्होंने आयुर्वेद व एलोपैथ के संबंध में कहा कि यह दोनों पैथी एक दूसरे के पूरक हैं। बताया कि अपने 5 दशक से अधिक के चिकित्सकीय जीवन में एलोपैथिक फिजीशियन व सर्जन को प्रिस्क्रिप्शन पर हिमालया कंपनी के आयुर्वेदिक दवाएं भी लिखते हुए देखा है।
श्री सिंह ने कहाकि आयुर्वेद पर किसी एक व्यक्ति का एकाधिकार नहीं हो सकता, यह हमारी प्राचीन चिकित्सा विधा है। विधाओं को मूर्त रूप देने में लाखों लोगों का योगदान है। कोई भी पैथी जाति धर्म पर आधारित नहीं बल्कि सभी पैथीयां बिना भेदभाव पीड़ित मानवता के कष्टों को दूर करने का काम करती हैं।
कुछ लोगों द्वारा आई एम में संगठन को ईसाई मिशनरी के प्रचार संस्था बताने के संबंध में उन्होंने कहा कि आईएमए एलोपैथिक डॉक्टरों का एक संगठन है। अन्य ट्रेड यूनियनों की तरह यह संस्था का भी अपने सदस्यों के हितों का ध्यान रखना इसका मूल कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में अधिकांश संस्थाएं व कानून अंग्रेजो के कार्यकाल से आज तक मूल रूप में चले आ रहे हैं। तो क्या सभी संस्थाओं को ईसाई मिशनरी के लिए काम करने का आरोप लगाया जाएगा। आईएमए एक गैर राजनीतिक व गैर धार्मिक एसोसिएशन है, इसका किसी भी धर्म विशेष से कोई लेना देना नहीं है।
उन्होंने आम जनता से अनुरोध करते हुए कहा कि लोग सच्चाई को समझते हुए आयुर्वेद व एलोपैथ के विवाद से दूर रहें। व जिस भी चिकित्सा पद्धति में उन्हें आराम मिलता हो उस पैथी से इलाज कराकर स्वास्थ्य लाभ लें।

