शब्द मसीहा : दिस इज बिजनेस
“एडिटर साहब ! ये कोर्पोरेट वाला कुछ ज्यादा उछल रहा है . इसका कोई ईलाज करना पड़ेगा .”
“अरे! क्या हुआ ?”
“एक स्टोरी कवर की है इसकी . साले की औकात पता चल जायेगी . ये तो पूरा चोर है .”
“अच्छा है , लाओ दिखाओ जरा .”
स्टोरी देखने के बाद एडिटर ने फोन लगाया . कुछ देर बात की और फिर मुस्कुराते हुए फोन रख दिया .
“बहुत खूब काम किया है तुमने . आज से तुम यहाँ ऑफिस में समाचार डेस्क पर काम करोगे और बीस हजार रुपये का प्रोमोशन भी .” एडिटर ने कहा .
“थैंक यू सर . तो हम इसी स्टोरी से काम का श्री गणेश करते हैं .”
“अरे! कौन-सी स्टोरी ? प्रमोशन हो तो गया ….फॉरगेट इट.”
“व्हाट इज दिस?”
“सिंपल कोर्पोरेट डील .”
“और हमारा पत्रकार धर्म ?”
“हा हा हा ….दिस इज बिजनेस …कल उनका विज्ञापन शुरू हो रहा है अपने चैनल पर .”
शब्द मसीहा

