बिल्थरारोड को जिला बनाने की मुहिम में अब ग्राम प्रधान, जिलापंचायत व बीडीसी सदस्यों से समर्थन मांग रहे अब्दुल रहमान
बिल्थरारोड/बलिया। बिल्थरारोड का सर्वांगीण विकास उसके जिला बनने पर ही संभव है। जिले के इस उपेक्षित तहसील को जिला बनाने की मुहिम लेकर चल रहे पिपरौलीबड़ा गांव के प्रधानप्रतिनिधि का संघर्ष लगातार जारी है। जिला बनाने के लिए जहां उन्होने मुख्यमंत्री समेत क्षेत्र की माटी से जुड़े सांसद व विधायक से पत्राचार किया वहीं नगर व गांव-गांव का भ्रमण कर इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ ही एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराकर उसे मुख्यमंत्री को भेजने का कार्य जारी है। प्रधानप्रतिनिधि अब एक कदम और बढ़ाते हुए क्षेत्र के ग्राम प्रधानो, जिला पंचायत सदस्यों, बीडीसी व ब्लाक प्रमुखों से इसके लिए समर्थन मांगते देखे जा रहे हैं।
जिले से 65 किमी दूरी पर स्थित बिल्थरारोड विकास की बाट जोह रहा है। विकास से दूर रहने के चलते यहां के स्कूल से लेकर अस्पताल तक बदहाल हैं। जिले से काफी दूरी होने के चलते सरकारी योजनाओं का सही तरीके से यहां क्रियान्वयन नही हो पाता जिसके चलते क्षेत्रवासियों को इसका भरपूर लाभ नही मिल पाता है। क्षेत्र को विकास के पथ पर अग्रसर होने के लिए इसका जिला बनना अति आवश्यक है। क्षेत्र के विकासपुरूष के रूप् में विख्यात सपा के पूर्व मंत्री स्व0 शारदानंद अंचल ने सर्वप्रथम बिल्थरारोड को जिला बनाने की पहल शुरू की थी। उस पहल को बाद में भाजपा के पूर्व मंत्री हरिनारायण राजभर ने आगे बढ़ाने का कार्य किया। परन्तु बाद में जनप्रतिनिधियो की उदासी के चलते यह मांग धीरे धीरे कमजोर होता गया। समय के साथ बलिया जिला जहां विकास की ओर अग्रसर रहा वहीं बिल्थरारोड की उपेक्षा जारी रही। आलम यह है कि ए ग्रेड व आदर्श रेलवे स्टेशन का दर्जा प्राप्त करने के बावजूद स्थानीय स्टेशन पर सुविधाओं का टोटा है। वाराणसी व गोरखपुर रेलवे स्टेशन के मध्य सर्वाधिक आय देने के बावजूद इस रेलवे स्टेशन पर बापूधाम, शालीमार व गोरखपुर-पुणे एक्सप्रेस तक का ठहराव न होना इसकी उपेक्षा का जीता जागता उदाहरण है। जिला बनने की स्थिति में जहां क्षेत्र के अस्पतालों, विद्यालयों सहित अनेक सरकारी सुविधाओं के विकसित होने का लोगो को लाभ मिलेगा ही, वहीं उन्हे न्याय पाने के लिए 65 किमी दूर जिले पर जाकर दिनभर भटकने से भी निजात मिल जायेगा। जिले से दूरी के चलते क्षेत्र की उपेक्षा इस बात से भी समझा जा सकता है कि तहसील की स्थापना के 23 वर्ष बाद भी न तो यहां यहां सीओ सर्किल बन सका है और नही ही एक फायर स्टेशन ही। यहां तक कि विद्युत आपूर्ति के मामले में भी इस तहसील में 132/33 केबीए का विद्युत उपकेन्द्र की स्थापना न होने से यह तीन स्थानो जिले के सिकन्दरपुर स्थित करमौता, रसड़ा व मऊ जिले के कसारा स्थित 132/33 विद्युत उपकेन्द्र पर निर्भर है है। बिल्थरारोड के सर्वांगीण विकास का एकमात्र रास्ता अब इसे जिला बनाने पर ही संभव है। इसी बात को ठानकर पिपरौली बड़ागांव के प्रधान प्रतिनिधि अब्दुल रहमान ने अपने बुलंद हौसले के साथ इसे जिला बनाने की मुहिम में पूरी ताकत झोंक दियें है। अपने इस मुहिम में अब वे ग्राम प्रधानों, जिलापंचायत सदस्यों, बीडीसी सदस्यों व नगरा व सीयर ब्लाक प्रमुखों से इसके लिए समर्थन लेने के लिए अपने कदम आगे बढ़ा दिये हैं।
