चर्चा में

जैविक कृषि केवल व्यवसाय नहीं, सही जीवन जीने का एकमात्र तरीका है : ज़िया उल हक खान

जयपुर। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय, आगरा द्वारा जयपुर में एमएसएमई प्रौद्योगिकी विकास (पीपीडीसी) के तत्वावाधान में 17-18 मार्च को MEET CONSULTANCY (Mahiaa Energy & Environment Technology Consultancy Services ) द्वारा दो दिवसीय “जैविक खेती व्यवसाय” पर उद्यमिता विकास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें ट्रेनर जिया उल हक खान द्वारा विक्रमी संवत के नववर्ष के शुभ अवसर पर प्रतिभागियों को जैविक कृषि अपना कर पर्यावरण और धरती की रक्षा करने का संकल्प दिलाया गया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए ट्रेनर जियाउल हक खान ने बताया कि भारत सरकार भी इस खेती को अपनाने के लिए जोर-शोर से प्रचार-प्रसार कर रही है। कहा कि आधुनिक समय में निरन्तर बढ़ती हुई जनसंख्या, पर्यावरण प्रदूषण, भूमि की उर्वरा शक्ति का संरक्षण एवं मानव स्वास्थ्य के लिए जैविक खेती की राह अत्यन्त लाभदायक है। मानव जीवन के सर्वागीण विकास के लिए नितान्त आवश्यक है कि प्राकृतिक संसाधन प्रदूषित न हो, शुद्ध वातावरण रहे एवं
पौष्टिक आहार मिलता रहे। इसके लिए हमे जैविक खेती की कृषि पद्धतियों को अपनाना होगा, जोकि हमारे नैसर्गिक संसाधनों एवं मानवीय पर्यावरण को प्रदूषित किये बगैर समस्त जनमानस को खाद्य सामग्री उपलब्ध करा सकेगी तथा हमें खुशहाल जीने की राह दिखा सकेगी। कहा कि भारत वर्ष में
ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है और कृषकों की मुख्य आय का साधन खेती है। कहा कि अधिक उत्पादन के लिए, खेती में अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरको एवं कीटनाशक का उपयोग करना पड़ता है। जिससे सीमान्य व छोटे कृषक के पास कम जोत में अत्यधिक लागत लग रही है और जल, भूमि, वायु और वातावरण भी प्रदूषित हो रहा है साथ ही खाद्य पदार्थ भी जहरीले हो रहे है। इस प्रकार उपरोक्त सभी समस्याओं से निपटने के लिए गत वर्षो से निरन्तर टिकाऊ खेती के सिद्धान्त पर खेती करने की सिफारिश की गयी। जिसे कृषि विभाग ने इस विशेष प्रकार की खेती को अपनाने के लिए बढ़ावा दिया। जिसे हम जैविक खेती के नाम से जानते है।
उन्होंने कहा कि “वसुधैव कुटुम्बकम” का आधार है -जैविक कृषि।
“सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरमायाः सर्वे भद्राणि पश्यंतू कश्चिद दुःख भाग्भवेत्” का सारा है-जैविक कृषि। गौमाता का अधिकार है- जैविक कृषि| भारतीय संस्कृति हैं, संस्कार है-जैविक कृषि।
स्वस्थ्य जीवन का द्वार है- जैविक कृषि।
केवल व्यवसाय नहीं, विचार है- जैविक कृषि।
ज्ञात हो कि श्री जिया उल हक,
(डा. राम अवध राम, वरिष्ठ वैज्ञानिक, केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान , सीआईएसएच, लखनऊ) के क्षात्र हैं।
कार्यक्रम के पहले दिन अतिथि वकता रहे ONECERT ORGANIC CERTIFICATION AGENCY के धीरज शर्मा एवं श्री विशाल कुमार चौहान ने प्रतिभागियों को “जैविक कृषि” की प्रमाणीकरण प्रक्रिया एवं उससे होने वाले लाभ से अवगत कराया।
कार्यक्रम के दूसरे दिन अतिथि वकता रहीं, डा. दीपिका सैनी, जोकि APEDA द्वारा संचालित Rajasthan Organic Certification Agency(ROCA), की “Tracenet” Incharge and Auditor हैं, ने प्रतिभागियों को “जैविक कृषि उत्पादों” के व्यवसाय एवं निर्यात के अवसरों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के अंत में संयोजक श्री अनूप शर्मा एवं सहसंयोजक श्री पंकज शर्मा ने सभी वकताओं एवं प्रतिभागियों का आभार प्रकट किया। प्रतिभागियों को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय, के “प्रमाणपत्र” वितरण द्वारा कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन समपन्न हुआ।

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