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कप्तान साहब ! आखिर ऐसे गैर जिम्मेदार लोगों को जिम्मेदारी दी ही क्यों जाती है ?

( आनन्द कुमार )

मऊ। कप्तान साहब आपके चिरैयाकोट थानाध्यक्ष कोई भी सूचना पत्रकार को देने को अधिकृत नहीं है वे सिर्फ आपको बताएंगे। यह आपको लगे या ना लगे लेकिन यह स्पष्ट है कि ऐसे ही इंचार्जों की बदौलत पुलिस विभाग पर सवाल उठता है। आखिर ऐसे गैर जिम्मेदार लोगों को जिम्मेदारी दी ही क्यों जाती है। जिसका बोलते बोलते जुबान भी वहक जाए।
पुलिस अधीक्षक महोदय चलिए आपको बताते चले कि मामला क्या है। थानाध्यक्ष चिरैयाकोट द्वारा जनसंदेश अखबार रिपोर्टर एडवोकेट आशीष पाण्डेय द्वारा अपराध के बारे में जानकारी पूछे जाने पर कोई भी संतोषजनक जवाब देने के बजाय उनका कहना है कि वह केवल कप्तान साहब को बताने के लिए जिम्मेदार हैं और किसी के लिए नहीं और टूटकर के पत्रकार से कहा कि चोरी की जानकारी जाकर के थाने से पता लगाओ मोबाइल पर नहीं बताएंगे।
पूरा मामला यह है कि थाना चिरैयाकोट अंतर्गत दो मोटरसाइकिलों की चोरी हुई और चोरों के शिकार मोटरसाइकिल स्वामी अपना मुकदमा दर्ज कराने के लिए थाने का चक्कर लगाते रहे लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हुआ उसमें एक मोटरसाइकिल स्वामी पत्रकार के रिश्तेदार थे। जानकारी होते ही पत्रकार आशीष पाण्डेय ने थानाध्यक्ष से अपने रिश्तेदार की मोटरसाइकिल व पड़ोस के एक मोटरसाइकिल के गायब होने के बारे में और मुकदमा दर्ज किए जाने के बारे में थानाध्यक्ष से जब पूछा तो थानाध्यक्ष शिकायत सुनने के बजाय और मुकदमा दर्ज करने के बजाए पत्रकार को नसीहत दे डाली कि वह आपको सूचना देने के लिए बाध्य नहीं है। थानाध्यक्ष ने कहा मोटर साइकिल चोरी ही बहुत बड़ी खबर है। आपको कोई जानकारी नहीं दूंगा, जिनका मामला है उन्हे भेजो। और आपके लिए तो जरूरी है तो जानकारी जाकर थाने से लिया करो। आप अपने हद में रहो। जबकि पत्रकार ने जब कहा कि पीड़ित कई बार थाने गया था आपसे मुलाकात भी हुई थी लेकिन थानाध्यक्ष साहब हैं कि सुनने का नाम ही नहीं ले रहे हैं।
व्यथित पत्रकार ने पुलिस अधीक्षक को वार्ता का अंश भेजकर अपने साथ हुए दुर्व्यवहार पर कार्रवाई की गुहार लगाई है।
कप्तान साहब यह बहुत छोटा मामला है लेकिन थानाध्यक्ष द्वारा किसी खबर की रिपोर्टिंग के लिए पत्रकार को इस तरह से बताना और इस तरह का व्यवहार करना यह कदाचित उचित नहीं है। यह आप बखूबी समझ सकते हैं क्योंकि जब थाना इंचार्ज महोदय का इसी तरह का मन रहेगा तो आगे और इससे कुछ अलग भी बोल सकते हैं। आखिर आप ही बताइए जब आज 25 मई 2021 हो गया और घटना 21 तारीख और उसके बाद की है तो फिर चोरी की रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज की गई। क्या यह माना जाए की आपकी पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने में आनाकानी करती है और शासन के नियम कानून की धज्जियां उड़ा रही है। ऐसे में जब कोविड-19 डिजिटल युग से चलाया जा रहा है तो क्या हर खबर को जाकर थाने पता किया जाए या पुलिस विभाग जो खबर मोबाइल या व्हाट्सएप, ईमेल पर अपनी भेजती है उनसे यह कहा जाए कि अपनी खबर अखबारों के दफ्तर में आकर पहुंचाएं या पत्रकार से मिलकर दे जाएं आखिर इस डिजिटल युग में आपकी पुलिस कहां जी रही है।
मामले की शिकायत जब ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष हरिद्वार राय के पास पहुंची तो उन्होंने कहा कि उनका तवियत ठीक नहीं है तवियत ठीक होते ही पत्रकारों का एक शिष्टमंडल पुलिस अधीक्षक से मिलकर पत्रकार उत्पीड़न का मामला मजबूती के साथ उठाएगा और कठोर कार्रवाई की मांग करेगा।
ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन मऊ के महामंत्री प्रदीप सिंह ने कहा कि थानाध्यक्ष को अपने थाना क्षेत्र में घटित घटनाओं के संदर्भ में जानकारी देने का प्रावधान शासन स्तर से ही है। इसके बावजूद यदि किसी पत्रकार के साथ थानाध्यक्ष अमर्यादित व्यवहार करते हैं तो उनके खिलाफ पत्रकार संगठन पुलिस अधीक्षक से मिलकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराएगी क्योंकि सूचनाओं से वंचित करना अपराध है मामले में थानाध्यक्ष का व्यवहार निंदनीय है।

श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के उपाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह ने कहा कि संगठन थानाध्यक्ष चिरैयाकोट के इस कृत्य की निन्दा करता है। साथ ही थानाध्यक्ष के विरुद्ध पुलिस अधीक्षक से कार्यवाही की मांग करता है। साथ ही पुलिस अधीक्षक से मांग करता है कि जिस तरह पुलिस के गुडवर्क के लिए मीडिया को जानकारी दी जाती है उसी प्रकार अगर किसी पीडित की रिपोर्ट थानो दर्ज नहीं की जाती है तो पत्रकार उस बावत जानकारी चाह रहा है तो शालीनता से पत्रकारों को उसकी भी जानकारी दे।

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