इकलौते औलाद के इलाज के लिए दर-दर हाथ फैला रहे मां-बाप
(पवन कुमार पाण्डेय)
मधुबन/मऊ। कहतें है गरीबी वह कड़वा घुट है जो इन्सान को जीते जी मार डालता है। कुछ यहीं उक्ति चरितार्थ हो रहा है मधुबन नगर पंचायत के बरईटोला निवासी उमेश साहनी के साथ। उमेश भूमिहीन है तथा अपनें परिवार का भरण पोषण मज़दूरी करतें हुए करता है । पत्नी ममता भी मजदूरी करतें हुए पति का गृहस्थी में हाथ बंटाती है । इसी बीच फरवरी 2020 में इसके इकलौते 8 वर्षीय बेटे अंश को लीवर की बिमारी हो गई । माता पिता ने अपने हृदय के टुकडे को बचाने के लिए अपने आभूषण से लगायत महत्वपूर्ण सामानों को बेच दिया ।तथा स्थानीय चिकित्सकों के साथ जिला मुख्यालय के चिकित्सकों से उपचार कराए लेकिन कोई लाभ नहीं मिला । उच्च चिकित्सकों ने अंश को अच्छे अस्पताल में इलाज कराने के लिए रेफर कर दिया । लेकिन पहलें ही माता पिता अपनें हृदय के टुकडे को बचाने के लिए अपना सब कुछ विक्रय कर दिया था । अब हालत यह है कि अंश की स्थिति बिगड़ती जा रहीं है । माँ ममता भिक्षाटन करतें हुए कुछ दवाओं का इन्तजाम तो कर रहीं है । लेकिन मात्र कुछ दवाओं से ही काम नहीं चलना है । लीवर के बिमारी का इलाज उच्च अस्पताल में ही संभव है । पिता उमेश एवं माता ममता ने बेटे के इलाज के लिए क्षेत्रीय विधायक एवं वन मंत्री दारा सिंह चौहान के कुछ जानने वालें लोगों के साथ क्षेत्रीय समाजिक लोगों से भी गुहार लगाई लेकिन यहां भी ढ़ाक के तीन पात साबित हुआ। सभी ने पल्ला झाड़ लिया । अब हालत यह है कि माता पिता अपनें आखों के सामने अपने एकलौते बेटे को तिल तिल मरता देख रहें है लेकिन इनके सहयोग के लिए कोई आगें नहीं आ रहा।

