अपना जिला

नेताओं का जमघट, मतदाता मौन, रोज़ बन और बिगड़ रहें समीकरण

@विकास सिंह निकुम्भ…

मऊ। घोसी विधानसभा उपचुनाव के रोज बनते-बिगड़ते समीकरण के बीच बाहरी नेताओं का जमावड़ा प्रत्याशियों की रणनीति पर खतरा का सबब बनता नजर आ रहा है। सत्ताधारी दल द्वारा दर्जनों मंत्रियों व जातिगत नेताओं द्वारा जगह-जगह पर वोट का समीकरण साधने के बीच सपा प्रत्याशी ने भी अपनी ताकत झोंक दिया है। इस बीच अपने ही विधायक को दोबारा मत देने का आक्रोश पाले मतदाताओं का घोसी में जातिगत नेताओं की बौछार ने माहौल को और भी रोचक बना दिया है। अपने दल के शीर्षस्थ नेताओं के चाय-पानी के प्रबंध में जुटे स्थानीय नेताओं द्वारा प्रचार न करना भी ऑंकड़ों का बदलने में सक्षम हो सकता है। भाजपा जिलाध्यक्षी पर अपनी गोटी सेट करने में जुटे कुछेक भाजपा नेताओं द्वारा भीतरघात करने की जुड़ी खबरें भी परदे के पीछे बनी हुई हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान की नगरी अयोध्या का अंतिम परकोटा और महाराज नहूष के श्राप के काल को भोगने वाली घोसी नगरी में हो रहे विधानसभा उपचुनाव में पहली बार पूरे देश की निगाह लगी हुई है। यह उपचुनाव केवल दो दल के प्रत्याशियों का नहीं अपितू एनडीए और इंडिया गठबंधन की स्थिति का भी आकलन करने वाला है। पार्टी बदलने के बाद भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे दारा सिंह चौहान ने अपने राजनीति शंतरज की बिसात पर हर कोने में पहरेदार खड़े कर दिये हैं। दर्जनों मंत्रियों और पार्टी के आला पदाधिकारियों को मैदान में उतार दिया गया है। इससे इतर कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय द्वारा सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह के पक्ष में समर्थन पत्र आते ही पूरे उत्साह के साथ सपा के पक्ष में लग गए हैं। सीपीआई के ज़िला सचिव रामसोच यादव ने बताया कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भी समर्थन की चिट्ठी सपा प्रत्याशी को सौंप दी है। सीपीआई अब पूरी ताक़त के साथ सपा प्रत्याशी को विजयी बनाने के लिए लगेगी। इसके अलावा मोदी के कटप्पा व सुहलदेव स्वाभिमान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र राजभर पहले से ही अपना समर्थन देकर ताल ठोक रहे हैं । ऐसे में ये दल थोड़े थोड़े वोट को भी प्रभावित करेंगे तो अच्छा ख़ासा मत प्रभावित होने का अनुमान है। वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष का गृह क्षेत्र होने की वजह से उनकी ज़िम्मेदारी और बढ़ जाती है। वहीं आम जनता पार्टी सोशलिस्ट के प्रत्याशी राजकुमार चौहान भी ठीक ठाक वोटों में सेंध लगाकर सत्ताधारी दल के प्रत्याशी के लिए खतरा प्रतीत हो रहे हैं। इसके साथ अपने बिगड़ैल बोल से रोज की राजनीति को साधकर अपनी हनक साधने वाले सुभासपा मुखिया ओमप्रकाश राजभर के लिए यह चुनाव अस्तित्व का बना हुआ है। उनकी पार्टी के पूर्व प्रत्याशी और कार्यकर्ताओं द्वारा नया दल बनाने के साथ ही खुलेआम सुधाकर सिंह के साथ आने से ओमप्रकाश की खटिया भी खड़ी होने की संभावना बनी हुई है। ओमप्रकाश का एक जाति विशेष पर दिये बयान के बाद यादव समुदाय भी अब लामबंद दिख रहा है। ब्राह्मण मत को अपनी ओर साधने की कोशिश में उमेशचंद पांडेय को भले ही भाजपा में सम्मिलित कराया गया है पर यह निर्विवाद सत्य है कि घोसी विधानसभा चुनाव में सुधाकर सिंह सर्वसमाज के एकमात्र नेता हैं। सुबह कुछ और तो शाम तक कुछ और रंग बदलती घोसी उपचुनाव की राजनीति किस करवट बैठती है यह तो आगामी आठ सितंबर को तय हो जाएगा पर अभी तक रोज ही दोनो प्रत्याशियों का ब्लड प्रेशर हर घंटा उपर नीचे हो रहा है।

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