उत्तर प्रदेश

जमीन के खेल पर डिजिटल ताला: अब खतौनी से मैच होगा नाम तभी होगी रजिस्ट्री

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जमीन के खेल पर डिजिटल ताला: अब खतौनी से मैच होगा नाम तभी होगी रजिस्ट्री

उत्तर प्रदेश में जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़े फर्जीवाड़े और भू-माफियाओं की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब राज्य में किसी भी जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री तभी होगी जब बेचने वाले व्यक्ति का नाम सरकारी राजस्व रिकॉर्ड यानी खतौनी में दर्ज नाम से पूरी तरह मेल खाएगा। अगर नाम में जरा भी अंतर मिला तो रजिस्ट्री तुरंत रोक दी जाएगी।

🔎 क्या बदलेगा नए नियम से

कैबिनेट बैठक में इस नए नियम को मंजूरी दी गई, जिसका उद्देश्य जमीन से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों को खत्म करना है। अब रजिस्ट्रेशन से पहले सब-रजिस्ट्रार कार्यालय सीधे राजस्व रिकॉर्ड से जमीन की खतौनी निकालकर उसका मिलान करेगा।

  • सबसे पहले जमीन की खतौनी चेक होगी।
  • उसमें दर्ज मालिक का नाम विक्रेता के पहचान पत्र से मिलाया जाएगा।
  • नाम अलग होने या संदेह होने पर रजिस्ट्री रोककर जांच शुरू होगी।

इस प्रक्रिया के लागू होने से फर्जी दस्तावेजों के सहारे जमीन बेचने वाले गिरोहों पर कड़ा प्रहार माना जा रहा है।

⚠️ पहले क्या थी समस्या

अब तक रजिस्ट्रेशन के दौरान मुख्य ध्यान स्टांप शुल्क जमा होने और विक्रेता के पहचान पत्र पर ही रहता था। कई मामलों में राजस्व रिकॉर्ड से सीधे मिलान नहीं किया जाता था। इसी कमी का फायदा उठाकर जालसाज नकली दस्तावेज या फर्जी पहचान के सहारे जमीन बेच देते थे। कई बार मृत व्यक्तियों की जमीन भी फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी से बेच दी जाती थी, जिससे असली मालिक और खरीदार दोनों को कोर्ट के लंबे चक्कर लगाने पड़ते थे।

📄 खतौनी क्यों है इतनी अहम

खतौनी दरअसल जमीन का आधिकारिक अधिकार अभिलेख होता है। इसमें जमीन के मालिक का नाम, हिस्सेदारी, कुल रकबा, गाटा या खसरा नंबर और उस जमीन पर किसी कर्ज या विवाद की जानकारी दर्ज होती है।

सरकार ने इस रिकॉर्ड को डिजिटल बनाकर ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया है, जिससे अब रजिस्ट्रेशन विभाग सीधे सिस्टम से डाटा निकालकर सत्यापन कर सकेगा।

💰 शुल्क वितरण में भी बदलाव

कैबिनेट ने स्टांप ड्यूटी और विकास शुल्क से जुड़े नियमों में भी संशोधन किया है। अब नगर निकायों को मिलने वाला फंड हर छह महीने में सीधे जारी किया जाएगा। पहले यह राशि उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने के बाद मिलती थी, जिससे विकास कार्यों में देरी होती थी।

🚌 गांवों के लिए नई परिवहन योजना

कैबिनेट बैठक में ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए “मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना” को भी मंजूरी मिली है। इस योजना के तहत राज्य के लगभग 59 हजार से अधिक गांवों को बस सेवा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार निजी ऑपरेटरों के साथ मिलकर छोटी बसें और मिनी वैन चलाएगी, जिन पर परमिट टैक्स में छूट भी दी जाएगी ताकि किराया कम रखा जा सके और ग्रामीणों को सस्ती यात्रा सुविधा मिल सके।

👨‍👩‍👧‍👦 आम लोगों को क्या फायदा

नई व्यवस्था लागू होने से जमीन खरीदने वाले लोगों को सबसे बड़ा लाभ सुरक्षा का मिलेगा। अब फर्जी रजिस्ट्री या विवादित जमीन खरीदने का जोखिम काफी कम हो जाएगा। साथ ही लोगों को अपनी खरीदी हुई जमीन का दाखिल-खारिज समय पर कराना भी जरूरी होगा, क्योंकि खतौनी में नाम अपडेट हुए बिना आगे जमीन बेचना संभव नहीं होगा।

👉 कुल मिलाकर सरकार का यह कदम जमीन के कारोबार को पारदर्शी बनाने और भू-माफियाओं के नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। साथ ही ग्रामीण परिवहन योजना से गांवों की कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है। 🚍

 

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