प्रतिशोध का दबाव
सम्पादकीय…
राजेश कुमार सिंह
आतंकवादियों द्वारा पहलगाम में किये गए कुत्सित कृत्य के बाद हमारे देश के कुछ जागरूक लोगों द्वारा सोशल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से सरकार पर सैनिक कार्यवाही आदि के माध्यम से जल्दी जबाव देने का दबाव देखने व सुनने को मिल रहा है। हम उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं। ऐसा कहना और सोचना स्वभाविक है। वास्तव में अगर हम अब तक की सरकार की प्रतिक्रियाओं का सिंहावलोकन करेंगें तो पाएंगे कि प्रतिशोध की कार्यवाही तो घटना के तुरंत बाद प्रारंभ हो गयी। आप इसकी प्रतिध्वनि को भी महशूस कर रहें होंगें। जो किसी कार्यवाही का पैरामीटर होता है । देश के प्रतिशोधात्मक प्रतिक्रिया का ही रिफ्लेक्शन है कि पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री रात में दो बजे के लगभग प्रेस कांफ्रेंस करते हैं । आप सोच सकते हैं क्या यह समय सामान्य प्रेस कांफ्रेंस का है ? कत्तई नहीं । आर्थिक क्षति करते हुए पड़ोसी अपने एयरस्पेस को हमारे देश के लिए बन्द करता है । आप इससे होने वाले उसकी आर्थिक हानि का आंकलन कर सकते हैं। सात दिनों से लगातार सीमा पर सीज़ फायर का उल्लंघन हो रहा है। इस पर आज ही मीडिया सूचना के अनुसार दोनों देशों के डीजीएमओ की हाट लाइन पर वार्ता भी हुई। सिंधु समझौते के वास्तविक परिणाम अभी या भविष्य में जो हों , लेकिन उसपर सीमा पार की प्रतिक्रिया ,उनकी हताशा को दिखा रही है । आर्थिक रूप से परेशान रहते हुए भी सैनिक विमानों और सामग्रियों के उनके क्रय के प्रयास की आप अनदेखी नहीं कर सकते। सबसे बड़ी बात नोटिस करने वाली यह है कि वहां के करिगिल युद्ध के समय के प्रधानमंत्री जो बहुत अनुभवी नेता हैं और वर्तमान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ़ के बड़े भाई हैं, नवाज शरीफ़ भी, भारत से सैनिक टकराव न करने की सलाह दे रहें हैं । एक अनुभवी नेता जो कारिगिल युद्ध को अपनी भूल बता चुके हैं, ऐसे नेता की सलाह अपने आप मे बड़ी बात है । यह हमारे देश की ताकत-क्षमता है जो इस स्थिति में पड़ोसी को लेकर आयी है।
देश की विभिन्न महत्वपूर्ण कैबिनेट समितियों की बैठकें , प्रधानमंत्री और शीर्ष सम्बन्धित मंत्रियों ,अधिकारियों की पारस्परिक बैठकें और राष्ट्रपति से भी इन परिस्थितियों में मुलाक़ात को आप इग्नोर नहीं कर सकते । वास्तव में किसी भी बड़ी कार्ययोजना को कार्यान्वित करने के पूर्व एक जिम्मेदार देश और नेतृत्व को विभिन्न स्तरों पर अपने तैयारियों की जानकारी और समीक्षा करते हुए अपनी रणनीति बनानी होती है। किसी भी बड़े कदम के दूरगामी परिणाम होते हैं। और युद्ध में किन्तु परन्तु का कोई स्थान नहीं होता।यही कारण है कि हमारे देश का नेतृत्व योजनाबद्ध तरीके अपने निर्णय ले रहा है । उदाहरणस्वरूप आज भारत ने अपने एयर स्पेश को एक मई से पाकिस्तान के लिए बन्द कर दिया । भारत चाहता तो पड़ोसी के इस कार्य के तुरंत बाद यह कदम उठाया होता लेकिन ,नहीं ! यह निर्णय लगभग हप्तों बाद लिया गया। इसपर, हम क्या कहेंगें की देर कर दी ? नहीं! हमने उस पर होमवर्क किया तत्पश्चात निर्णय लिया। नुकशान तो आर्थिक होगा लेकिन विश्वास है कि सरकार उसके विभिन्न पहलुओं पर विचार की होगी।
मुझे याद है कि पुलवामा अटैक के बाद प्रधानमंत्री मोदी जी की प्रतिक्रिया और बॉडीलैंग्वेज। और उसके बाद की प्रतिक्रिया भारतीय सर्जिकल स्ट्राइक के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गयी । इस बार भी प्रधानमंत्री जी की जो प्रतिक्रिया बिहार की एक जन सभा के माध्यम से सामने आयी, इसमें न केवल आतंकवादियों को वरन उनके पोषक आकाओं को जिन कड़े शब्दों में सन्देश दिया गया , साथ ही विश्व के नेताओं को जो सन्देश दिया गया ,उनकी गम्भीरता पर मुझे तो पूर्व के अनुभव से पूर्ण विश्वास है कि कुछ बड़ा होने वाला है ।
आप पड़ोसी देश से आ रही सूचनाओं को अगर देखें तो आप पाएंगें की आतंकवादियों और उनके आकाओं के ठिकाने लगातार बदल रहें हैं । यह आप के देश का भय ही है जो उनको चंचल कर दिया है । आप को क्या लगता है हमारी इंटेलीजेंस एजेंसियां इसपर गौर नहीं कर रही होंगी ? ऐसा नहीं है, उनकी लगभग प्रत्येक गतिविधि उनकी नज़र में होगी। और इसका परिणाम आप अगर सर्जिकल स्ट्राइक टाइप में कुछ होता है तो देखेंगें । वास्तव में यह युग एडवांस टेक्नोलॉजी का है । वॉर फेयर में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। जब पूर्व के समय में शैलून से बाल का सेम्पल प्राप्त कर, उसमें यूरेनियम का रेडिएशन पता कर, परमाणु वैज्ञानिकों की उपस्थिति पता लगा ली जाती थी । फिर अब तो और एडवांस टेक्नोलॉजी आ गईं हैं। आप की सभी गतिविधियों को पता किया जा सकता है । आज के परिवेश में किसी का छुप पाना बहुत मुश्किल काम है ।और यह कार्य तब और भी मुश्किल हो जाता है, जब सामने भारत जैसी उभरती शक्ति हो और उसके सहयोग में विश्व की बड़ी -बड़ी इंटेलिजेंस एजेंसियों के होने की सम्भावना हो। हाँ हम यह नहीं कहते की इंटेलीजेंस फेल्योर नहीं हो सकता। जब ट्विन टॉवर की घटना, इजराइल में हमास का आक्रमण हो सकता है जिसके पास विश्व की सबसे ताक़तवर इंटेलिजेंस सीआईए और मोसाद जैसी सक्षम एजेंसियां हों तो कुछ भी संभव है। लेकिन यह भी निश्चित है ऐसा बार -बार होना बहुत मुश्किल है।
भारत एक भावना प्रधान देश है हम जन भावना का सम्मान करते हैं। कहते हैं जो भरा नहीं है भावों से ,जिसमें बहती रसधार नहीं ..। पहलगाम के बाद जो वेदना सर्वत्र है ,वह होनी भी चाहिए लेकिन मुझे विश्वास है कि देश नेतृत्व अपना लक्ष्य निर्धारित कर लिया है और सम्बन्धित एजेंसियों को लक्ष्य दे भी दिया होगा कि वह क्या चाहता है उसकी मंशा क्या है ।और सम्बन्धित विभाग व लोग अपना रोड मैप बना कर कार्य कर रहे होंगें इसमे मुझे कोई शक नहीं वरन पूर्ण विश्वास है। इस लिए सरकार और सेना को अपनी रणनीति के अनुसार कार्य करने में प्रत्यक्ष या परोक्ष सहयोग किया जाय तो ज्यादे बेहतरत होगा।
हम देख रहें हैं कि अरब सागर में हमारी वॉर सिप अपने युद्धाभ्यास के साथ मुस्तैद है। सामने पड़ोसी भी चौकन्ना दिखने का प्रयास कर रहा है । बार्डर पर राफेल और अन्य विमानों की गर्जना से पड़ोसी सहम सा गया है और अपने उन्नत श्रेणी के विमानों को भारतीय विमानो और सिस्टम की रेंज से दूर छुपाने के प्रयास कर रहा है कि कहीं प्रथम एयर स्ट्राइक में उनका काउंटर सिस्टम तबाह न हो जाये । वर्तमान युद्ध परिवेश में जिसकी एरफोर्स ,मिसाइल सिस्टम और स्पेस टेक्नोलॉजी एडवांस और मजबूत है वह किसी सुरक्षा घेरे को तोड़ देगा और विजय उसकी ही होनी है।
आज के प्रगति के युग मे युद्ध में होने वाला खर्च, देश के आर्थिक विकास के लगभग प्रतिकूल होता है । युद्ध और विकास लगभग एकदूसरे के व्युत्क्रमानुपती होते हैं । लेकिन यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि कोई सक्षम और स्वाभिमानी देश इसके कारण कठोर निर्णय लेने से पीछे भी नहीं हटेगा। इस समय हमारे देश मे स्थिर और मजबूत नेतृत्व वाली सरकार है, जिसको इस मुद्दे पर पूरे विपक्ष का सहयोग प्राप्त है। इस स्थिति में हम सभी को अपने कर्तब्य और दायित्व पथ पर अग्रसर होते हुए अपनी प्रतिक्रया सीमा का स्वनिर्धारण करते हुए सरकार और सेना को उसी प्रकार खुली छूट देने का माहौल बनाना चाहिए, जिस प्रकार प्रधानमंत्री व सम्बन्धित लोगों ने सेना को अपने लक्ष्य और समय निर्धारण के लिए उन्मुक्त छूट प्रदान की है। यह देश के सर्वथा हित मे होगा ।
मऊ ,उत्तरप्रदेश
9415367382
(यह लेखक का निज़ी विचार है )


आप के उत्सवर्धन से मुझे ऊर्जा मिलती है ।कुछ अच्छा लिखने के लिए प्रेरित होता हूँ ,और प्रयास करता हूँ । वास्तव में आर्टिकल लिखने में बहुत समय लगता है और जब इसको उचित स्थान मिल जाता है तो खुशी होती है।
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बहुत धन्यवाद