पुण्य स्मरण

राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ पर कथा सम्राट प्रेमचन्द की 141वीं जयन्ती पर साहित्यिक विमर्श का आयोजन

Apnamau newd

मऊ। राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ पर कथा सम्राट प्रेमचन्द की 141वीं जयन्ती पर साहित्यिक विमर्श का आयोजन हुआ। पीठ के आंगन में वर्तमान सामाजिक व राजनीतिक परिस्थितियों में प्रेमचंद साहित्य की भूमिका और साहित्य के द्वरॎा एक सुन्दर भविष्य की सम्भावनाओं पर चर्चा हुयी।
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ जयप्रकाश राय ‘धूमकेतु’ ने प्रेमचंद के विविध विषयों पर अनवरत और विशाल लेखन पर ध्यान दिलाते हुये वर्तमान में चल रहे किसान आंदोलन में मुंशी प्रेमचंद की प्रासंगिकता और उनके जैसे कार्य की आवश्यकता को उभारा। डॉ धूमकेतु ने बताया कि कथा के स्तर को प्रेमंचद ने एक नया आयाम दिया और उसे गल्प से बाहर ले आये।
इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुये कामरेड बसन्त , जिला सचिव, भाकपा ( माले) ने प्रेमचंद के उपन्यास निर्मला के शिल्प और कथानक का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने राजनीति को सदैव साहित्य का साथ बनाये रखने की सीख दी जिससे नीति निर्माताओं में मानवीय संवेदना का स्थान बना रहे।
युवा लेखक सुमित उपाध्याय ने प्रेमचंद की भाषा, शिल्प और एक विशाल लेखन सम्पदा का ज़िक्र करते हुये शोषक और शोषित के मध्य शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के खिलाफ प्रेमचंद के अनवरत संघर्ष और उनकी दलित चेतना को रेखांकित किया।
कॉ त्रिभुवन ने पूंजीवाद के विरूद्ध प्रेमचंद की लड़ाई को सदैव याद किये जाने की बात करते हुये, उनके “कुसुम ” कथा के आधार पर प्रेमचंद की स्त्री मन को आंकने की महीन कारीगरी का उल्लेख किया। नीमच में प्रमुख रूप से रामू प्रसाद, विद्याधर, साधु यादव, गणेश, दुर्ग विजय, रामबली, राजेश, इसरार, रजा आमिर, रमाशंकर आदि उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *