चुनावी समर में नहीं दिख रहा पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय कल्पनाथ राय का कुनबा
( प्रदीप सिंह )
मऊ ज़िले के घोसी लोकसभा सीट से सर्वाधिक बार संसद पहुंचने वाले विकास पुरुष पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय कल्पनाथ राय का कुनबा चुनाव मैदान में कहीं नहीं दिख रहा है। इनकी पत्नी, बहू और बेटे को किसी दल ने टिकट नहीं दिया ।
लिहाजा लोकसभा चुनाव में इनकी कहीं धमक या फिर हनक नहीं दिखाई पड़ रही है ।एक दौर था जब पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय कल्पनाथ राय का सियासतदारो के बीच अपनी एक अलग ही रसूख बरकरार रखते थे ।
पहली बार वर्ष 1989 में कल्पनाथ राय घोसी लोक सभा के सांसद चुने गए थे। श्री राय 1989 से 1998 तक लगातार 4 बार सांसद चुने गए, लेकिन उनकी मृत्य होते ही श्री राय के परिवारिक कुनबे ने अलग-अलग राजनीतिक दल थाम लिया। हालांकि मौजूदा समय में स्वर्गीय कल्पनाथ राय की धर्मपत्नी डॉ सुधा राय कांग्रेस पार्टी में अपने पति के पद चिन्हों पर चलते हुए कांग्रेस पार्टी में महिला उपाध्यक्ष के पद पर आसीन हैं। जबकि इन्हें कई प्रदेशों में कार्य करने की जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है। वर्ष 2014 में भी स्वर्गीय कल्पनाथ राय की धर्मपत्नी सुधा राय को कांग्रेस पार्टी ने बलिया लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने के लिए भेज दिया था। लेकिन उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा, जबकि वर्ष 2019 की लोकसभा के चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस पार्टी ने डॉ सुधा राय को टिकट नहीं दिया, बल्कि दूसरे दल को छोड़कर आए पूर्व सांसद बालकृष्ण चौहान को टिकट थमा दिया है।
पूर्व सांसद बालकृष्ण चौहान ने बुधवार को नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। अब डॉ सुधा राय को कांग्रेस पार्टी से टिकट मिलने की दूर दूर तक कोई आसार नहीं है। कमोबेश यही दल यही हाल पूर्व केंद्रीय मंत्री कल्पनाथ राय की पुत्र वधू डॉक्टर सीता राय के साथ भी दिख रहा है। डॉक्टर सीता राय मुगलसराय के विश्वविद्यालय में छात्र संघ अध्यक्ष पद के पद पर आसीन हो चुकी है। श्री राय के निधन के वक्त से राजनीतिक सफरनामा शुरू हुआ समता पार्टी, जनता दल और अब भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय नेतृत्व के रूप में कार्य कर रही हैं। इन्हें भाजपा ने वक्त-वक्त पर कई जिम्मेदारियां से नवाजा, लेकिन इन्हें भी लोकसभा और विधानसभा चुनाव से वंचित रखा गया है। नतीजा रहा कि वर्ष 2019 में एक बार फिर भाजपा पार्टी ने टिकट नहीं दिया । भाजपा ने सांसद रहे हरिनारायण राजभर को फिर से टिकट थमा दिया जबकि बेटा सिद्धार्थ राय कई दलों की राजनीति करने के बाद इन्हें कुछ भी नसीब नहीं हुआ । वर्तमान में स्वर्गीय श्री राय के सुपुत्र सिद्धार्थ राय का किसी राजनीतिक दल से सरोकार नहीं दिख रहा है। एक जमाने में अपने दमखम का जलवा बिखेरने वाले स्वर्गीय कल्पनाथ राय ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि ऐसा वक्त कभी आया कि उनका परिवार सियासत में टिकट पाने से वंचित हो जाएगा।
पूछे जाने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री की धर्म पत्नी का डॉ सुधा राय कहती हैं कि उनके पति ने जीवन पर्यंत कांग्रेस पार्टी की सेवा की है और वह खुद भी कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पित रहेंगी। वही भाजपा नेत्री डॉक्टर सीता राय कहती हैं कि टिकट देना या न देना पार्टी हाईकमान का निर्णय है। हर समय मै पार्टी के लिए कार्य करती रहूंगी।

