पालिका सभागार में फजा इबन-ए-फैजी की याद में गोष्ठी का आयोजन
मऊनाथ भंजन। उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी लखनऊ की सहायता से ‘सेव द ह्यूमेनिटी फाउण्डेशन’ के सौजन्य से ‘‘फेजा इबन-ए-फैजी-फन और शख्सियत’’ विषय पर एक गोष्ठी नगर पालिका परिषद के मीटिंग हाल में आयोजित की गयी। गोष्ठी की अध्यक्षता पालिकाध्यक्ष मु0 तय्यब पालकी ने की तथा संचालन डा0 इम्तेयाज अहमद नदीम ने किया।
इस अवसर पर मु0 तय्यब पालकी ने गोष्ठी में शामिल सभी मेहमानों एवं स्रोताओं का इस्तकबाल किया। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि मऊ की धरती धर्मिक विद्वानों एवं साहित्यकारों से भरी पड़ी है। मऊ शहर शिक्षा जगत में काफी उपजाऊ भूमि के रूप में जाना जाता है। यहां पर जन्मे व्यक्तियों ने अपनी क्षमता एवं दक्षता से अपनी ख्याति का क्षेत्र देश के बाहर तक विस्तृत कर लिया है। एक तरफ मऊ शहर राजनेताओं के रूप में मोलवी अब्दुल बाकी, मौलाना अब्दुल्लतीफ नोमानी और कल्पनाथ राय की कर्म-भूमि रहा है तो साहित्य के क्षेत्र में पं0 श्याम नारायण पाण्डेय और फजा इबन-ए-फैजी जैसे अद्वितीय व्यक्तित्व वाले उर्दू शायर ने अपनी सेवायें देकर मऊ की धरती को सम्मानित किया है। उन्होंने कहा कि फेजा इब-ए-फैजी मऊ के आसमान पर चमकते हुये प्रकाशमय सितारे के समान थे। उर्दू साहित्य में वह मऊ के एक महत्वपूर्ण एवं विश्वस्नीय शायर थे। उर्दू शायर के रूप में समुचे विश्व में उनका डंका बजता है। हमें ऐसे विश्वस्तरीय व्यक्तित्व के बारे में अपने बच्चों को बताने की आवश्यकता है। इस सम्बन्ध में यह गोष्ठी बहुत महत्वपूर्ण एवं प्रेरक सिद्ध होगी। श्री पालकी ने कहा कि वर्तमान में हमारी नई नस्ल उर्दू से बेजार होती जा रही है। ऐसे में इस प्रकार की गोष्ठी के आयोजन से इन्हें उर्दू भाषा से जोड़ने में मदद मिलेगी। इस अवसर पर उन्होंने मऊ के शैक्षिक, साहित्यिक एवं धार्मिक प्रचण्ड विद्वानों के बारे में भी चर्चा करते हुये कहा कि मऊ नगर को बुलन्दी तक पहुँचाने में हमें इन विद्वानों से प्रेरणा एवं मार्गदर्शन लेने की अत्यन्त आवश्यकता है जिन्होंने अपने अथक प्रयासों से शिक्षा एवं साहित्य को सार्थक बनाने में अहत किरदार अदा किया है।
डा0 शबाबुद्दीन ने अपना मन्तब्य देते हुये कहा कि फजा साहब न सिर्फ मऊ के एक कद्दावर उर्दू कवि थे बल्कि वे अपनी रचनाओं (शायरी) से विश्वभर में उर्दू भाषा के एक बड़े शयर के रूप में देखे जाते हैं। डा0 शबाबुद्दीन ने बताया कि फजा इबन-ए-फैजी 1923 में मऊ की सर जमीन पर एक बुनकर के घर पैदा हुये। 1990 में उन का निधन हुआ जिससे साहित्य की दुनिया को भारी क्षति पहुँची थी जिस की आज तक भरपायी सम्भव नहीं हो पायी है। उन्होंने साहित्य में कई प्रकार के उतार चढ़ाव देखे परन्तु उससे प्रभावित न होकर वे अपने लक्षित राह पर ही चलते गये। उन्होंने उर्दू साहित्य के क्षेत्र में गजल, नज़्म, हम्द, नात, रोबाई पर अद्वितीय रचनायें लिखकर अपना लोहा मनवाया है।
डा0 अशहर करीम ने फजा इबन-ए-फैजी की गजलों पर मकाला पेश किया। डा0 तारिक मंजूर ने अपने और फजा साहब के सम्बन्धों का जिक्र करते हुये बताया कि वह शान्त स्वभाव एवं ऊँची सोच के मालिक थे। अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को बेहतर बनाने में अच्छे प्रेरक के रूप में काम करने के साथ अपनी रचनाओं से आचरण निर्माण में अहम भूमिका निभाते रहे। इनके इलावा डा0 इम्तेयाज नदीम व डा0 शकील अहमद, शमसुलहसन फारूकी, डा0 मुहम्मद मोहसिन, ख्वाजा अहमद फारूकी, डा0 मोनीर आफाकी आदि ने भी फजा साहब को याद करते हुये उनके व्यक्तित्व एवं रचनाओं पर प्रकाश डाला। इम्तेयाज साकिब, नेजामुद्दीन और ताबिश रेहान ने फजा साहब की रचनाओं को मनमोहक अन्दाज में पढ़ा।
इस मौके पर डीसीएसकेपीजी कालेज के अध्यापक डा0 ज्याउल्लाह, असलम एडवोकेट, सरफराज फैजी व साहित्य प्रेमियों की बड़ी संख्या उपस्थित रही। ‘सेव द ह्यूमेनिटी फाउण्डेशन’ के सचिव मुहम्मद आरिफ ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के कन्वीनर जलाल सिद्दीकी ने सभी स्रोताओं का शुक्रिया अदा किया।


