मुठ्ठी भर पत्रकारों की अपील पर, बलिया में अभूतपूर्व बंदी पर हांफता रहा प्रशासन

० व्यापारियों ने दिया पत्रकारों का अभूतपूर्व सहयोग
0 चाय-पानी को भी तरसे लोग, हुई पुलिस से झड़प
0 शहर के अलावे कस्बों में भी दिखा बंदी का असर
बलिया। पेपर लीक कांड में गिरफ्तार पत्रकारों की रिहाई की मांग को लेकर शनिवार को आयोजित बंदी पूरी तरह से सफल रही। आलम यह था कि लोग चाय-पानी को भी तरस गये। इस दौरान पत्रकारों व पुलिस के बीच कई बार झड़प भी हुई।
यूपी बोर्ड परीक्षा के दौरान 30 मार्च को इंटर के अंग्रेजी विषय का पर्चा आउट हो गया। इस मामले में पुलिस ने पत्रकार अजीत ओझा, दिग्विजय सिंह व मनोज गुप्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। धरना-प्रदर्शन व क्रमिक अनशन के बाद शनिवार को बलिया बंद का ऐलान किया गया था। इसके लिये व्यापारी संगठनों तथा राजनीतिक दलों की ओर से भी समर्थन देने की घोषणा की गयी थी। सुबह पत्रकार बाइक जुलूस निकालकर दुकानदारों से बंदी को सफल करने की अपील करते रहे। सुबह करीब 10 बजे विशुनीपुर के पास प्रचार वाहन को लेकर कोतवाल प्रवीण सिंह के साथ पत्रकारों के साथ कहासुनी हुई। हालांकि मामला किसी तरह शांत हो सका। शहर की दुकानें पूरी तरह से बंद रही तथा लोग चाय-पान के लिये भी भटकते रहे। एहतियातन जगह-जगह पुलिस के जवानों को तैनात किया गया था। कई जगहों पर तो पत्रकार आग्रह कर दुकानें बंद कराकर जैसे जाते वैसे ही पुलिसकर्मी आकर उन्हें खुलवा दे रहे थे। यह सिलसिला स्टेशन-चौक रोड समेत अन्य जगहों पर कई बार चला। हालांकि दुकानदार भी पत्रकारों के पक्ष में लामबंद नजर आ रहे थे। कई दुकानदार तो ऐसे भी थे कि पुलिस के कहने के बाद भी अपनी दुकान खोलने को राजी नहीं थे।
ग्रामीण इलाकों में भी बंदी रही सफल…
पत्रकारों की रिहाई को लेकर शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी शनिवार को बंदी पूरी तरह से सफल रही। चितबड़ागांव, गड़वार, चिलकहर, फेफना, सागरपाली, सुखपुरा, रतसर, दुबहड़, हल्दी आदि चट्टी-चौराहों की दुकानें सुबह से दोपहर बाद तक पूरी तरह से बंद रही। पत्रकारों के समर्थन में व्यापारियों के उतरने के बाद बंदी को नई दिशा मिल गयी।





















