अरे वाह विधायक का पेंशन न लेने की घोषणा, कहा जब सरकारी कर्मियों को नहीं तो हमें क्यों

कुछ ऐसे लोग होते हैं जो ऐसा कर जाते हैं कि समाज से लेकर सरकार तक को सोचने के विवश कर जाते हैं। उनके फैसले का चर्चा चंहु ओर होने लगता है। मामला उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद का है। महमूदाबाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक नरेंद्र सिंह वर्मा ने अपनी विधायक पेंशन छोड़ने की घोषणा कर कर करके उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश के राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी है। विधायक नरेंद्र वर्मा ने कहा कि कर्मचारियों को पेंशन का लाभ मिलना चाहिए अगर ऐसा नहीं है तो केवल सेना व अर्धसैनिक बल के जवानों को छोड़कर किसी भी कर्मचारी व जनप्रतिनिधि को पेंशन का लाभ नहीं मिलना चाहिए। क्योंकि विधायिका जो कानून बनाती है वह सबके लिए एक बराबर होना चाहिए।

उन्होंने पेंशन छोड़ने की घोषणा के साथ साथ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर यह मांग भी किया है कि या तो सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाए या विधायकों सांसदों न्यायाधीशों को भी पेंशन योजना के दायरे में लाया जाए। उन्होंने पीएम और सीएम को भेजे गए पत्र में सेवानिवृत्त होने के बाद खुद को पेंशन न लेने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जब वर्ष 2004 के बाद नौकरी कर रहे सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों को पुरानी पेंशन से वंचित रखा जा रहा है तो सांसद, विधायक ( जनप्रतिनिधियों ) को भी पुराने पेंशन योजना का लाभ लेने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। विधायक नरेन्द्र सिंह ने पेंशन न लेने की घोषणा करके राजनैतिक गलियारों में नेताओं के माथे पर पसीना ला दिया है तो वहीं काफी दिनों से पुराने पेंशन की बहाली की मांग कर रह सरकारी कर्मियों को एक उम्मीद का किरण दे दिया है।

