अरमान

( कृष्णा भिवानीवाला )
कितने अरमानों से सजाया
मैंने अपने हृदय में सुंदर तौरन द्वार
कब आओगे मेरी नन्हीमुनिया के
सपनों के राजकुमार,
तन पे धेर धूमैर तुम्हारे
बाघा होगा
सिर पर सूरज सा चमकता
सेहरा होगा और होगी कमर को
चूमती सुनहरी तलवार
कितने मधुर वो पल होंगे
लाल सुनहरे जोड़ें में लिपटी
तुम मेरी मुनिया के संग होंगे
चांद, सितारे भी शर्मा ने लगें
देख मेरी मुनिया का सौरभ श्रृंगार
थाम हाथ जब तुम दोनों
पवित्र अग्नि के फैरे लोगे
हृदय में असंख्य अरमान होंगे
उसकी आंखों में सुंदर भविष्य के सपने होंगे
मेरे धर से जब डोली पहुंचेगी
तेरे द्वार
आगे बढ़कर पहन लेना
उसकी बांहों का सुंदर हार
कितने सुन्दर वो पल होंगे
जब तुम दोनों संग होंगे
मुनिया के चेहरे पे दमकता
सूरज होगा
वाणी में उसके शीतलता होगी
लज्जा से पलके झूकी होगी
और होगा उसके हृदय में
तुम्हारे लिए प्यार
कर सौलह श्रृंगार जब वो
प्रवेश करेगी
तेरे मन के द्वार देना प्यार
दुलार तुम इतना उसको
कुछ पल के लिए वो भूल
जाते हम सब को

