50 हजार घूस लेने के मामले में नायाब तहसीलदार को पांच साल की सजा, गये जेल, लेखपाल ने 05 वर्ष पहले पकड़वाया था रंगेहाथ

कहते हैं ना जब पद मिल जाए तो उसका ईमानदारी से निर्वहन की जिम्मेदारी स्वयं पद पाने वाले की हो जाती है। पद के साथ-साथ हमेशा कद का ख्याल रखना और सहेज कर रखना आपका नैतिक दायित्व हो जाता है। लेकिन पैसे की हवस कभी कभी इंसान का स्तर इतना गिरा देता है कि वे चन्द रूपयों खातिर अपने ईमान और धर्म को भूल जाता है।अगर आप अधिकारी, बाबू, कर्मचारी चाहे जिस भी पद पर आसीन हों, लेकिन आपको यह कतई भूलना नहीं चाहिए कि आपका नैतिक कर्तव्य क्या है।
अपने किए पर पता नहीं मध्यप्रदेश के नायाब तहसीलदार साहब को शर्म आ रही है या नहीं लेकिन बात शर्मिंदगी की ही है। मध्य प्रदेश के कटनी के विशेष न्यायालय ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के एक मामले में लोकायुक्त पुलिस के द्वारा वर्ष 2015 में 50 हजार की रिश्वत लेने के मामले में नायाब तहसीलदार मनोज कुमार सिंह पांच साल की सजा सुनाई है।
बताते चले कि मध्यप्रदेश के कटनी जनपद के बरही तहसील में तैनात नायाब तहसीलदार मनोज कुमार सिंह वर्ष 2015 में अपने कोर्ट में भूमि का नक्शा काटने का एक मामले में नक्शा सुधार किए जाने के एवज में पूर्व लेखपाल रोहणी प्रसाद पटेल से एक लाख रुपये की मांग की थी। रोहणी प्रसाद ने पहली किस्त में 50 हजार रुपए दे दिए और दूसरी क़िस्त देने के समय लोकायुक्त में शिकायत की थी। जिस पर लोकायुक्त पुलिस ने 30 दिसंबर 2015 को दूसरी क़िस्त लेते हुए तहसीलदार को उनके निवास पर रुपयों सहित रंगे हाथ पकड़ लिया था। वहीं प्रकरण में पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक संजय कुमार पटेल ने बताया कि मामले में प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायालय ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1-डी) सहपठित धारा 13(2) के अपराध में मनोज कुमार सिंह को दोषी पाया और पांच साल के कठोर कारावास और पचास हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। नायाब तहसीलदार मनोज का जेल वारंट बनाकर जेल भेज दिया गया है।
