रचनाकार

ऐ चाँद तुझे हृदय से वदंन…

डा. महिमा सिंह, चेन्नई, तमिलनाडु...

ऐ चाँद तुझे हृदय से वंदन
कौन हैं जिसको तेरा इंतजार नही।
तू ही तो लेकर है आता सुखद क्षण ।
मिलन की बेला फुर्सत के मीठे पल।
तू ही तो है जो ले आता भागती दौड़ती
जिंदगी मे ठहराव के मध्यम पल।
समपर्ण की बेला मे घोलती तेरी,
धवल चाँदनी सुनहरे खट्टे मीठे पल।
तुम बनते साक्षी ना जाने कितनी,
कहानियों के उतार चढाव के।
सारे रिश्तों के गणित का जोड़ घटाने
का गणित फल ,वैसा ही
जैसे घटते बढते तुम गगन मे और ,
होते पुरे एक दिन और दे जाते सीख
उम्मीद ना छोड़ ए दिल कोशिश
रंग लाती हैं जरूर बस एक जरा इंतजार ।
चाहे जितना घना हो अधेरा
तेरी चाँदनी भरती मन मे नयी आश ।
हस के मानो कानो मे उड़ेलती
एक नया विश्वास हृदय में एक नयी चाह।
आ चल लिखे कहानी नयी
वही हम वही तुम
एहसास नये, रंग नये, नाम कई।
मगर विशाल अंबर एक ही करता
इंतजार फैलाए बाहे टिमटिमाते तारे लिये
साथ ही ये बतलाता
ए चाँद तू एक मगर तेरे नाम कई
कभी दूज का चाँद
कभी चौदहवीं का चाँद
कभी पूनम का चाँद
कभी ईद का चाँद
कभी शरद का चाँद
करवा चौथ का चाँद
तो कभी महबूब का चाँद
आ तू भी तो कभी
ज़मीं पर देखना है तुझे करीब से ।
ए चांँद मुझको है, यकी की होगा कभी ऐसा भी
जब तू होगा मेरी गिरफ्त में,
मै जुगनू सी चमकूँगी
कुछ पल ही सही तुझे आँचल में छुपा कर रख लूँगी।
ऐ चाँद तू भी तो आ जमीं पर कभी।
तभी पीछे से प्रियतम बोले हमे तो रोज ही दिखता है धरती पे चाँद ।
ऐ चाँद ठहर जा पिया आए हैं बड़े मुद्दतों बाद

ऐ चाँद तू दूर होकर भी पास है ।
पिया पास होकर भी दूर से लगे
ना जाने क्यू कभी कभी “माहिमा” जानना चाहे पिया भी क्यू घटते बढ़ते तुमसे

क्या ये राज कभी महिमा समझ सकेगी?
ऐ चाँद तू भी तो आ ज़मी पर कभी।

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