रचनाकार

कितनी चालाक होती
हैं बेटियां….!!

@ भास्कर राय…

कितनी चालाक होती
हैं बेटियां….!!

#भास्कर राय

बड़ों को अपने प्यार से
छोटों को दुलार से
निष्छल मुस्कान से
सबको अपना
ताबेदार बना लेती
हैं बड़ी शान से
फिर भी पता नहीं क्यों ??
सब कहते हैं
ठीक-ठाक होती हैं बेटियां…!
कितनी चालक होती हैं बेटियां !!

माता-पिता की शान
तो कभी भाई का मान
बनकर बना लेती हैं
दिल में जगह..!
घर का हर कोना
करने लगता है उन पर गुमान!
आगन से बुआ की यादों को
भी साफ कर जाती हैं बेटियां
सच…चतुराई भरे प्यार में
कितनी शफ्फाक
होती हैं बेटियां..!
कितनी चालाक होती हैं बेटियां

बेटे का हौसला बढ़ाने को
उससे हारने वाले पिता से
जानबूझकर हार
जाती है बेटियां…
…ताकि पिता के हारने का
हौसला कायम रहे ताउम्र..
इस तरह भाई का गुरुर
उतार जाती है बेटियां…
बड़ी बेबाक होती है बेटियां..!
कितनी चालाक होती हैं बेटियां !

ससुराल में भी
सहेज कर रखती हैं
मन के “लॉकर” में
बचपन वाले घर की यादें
जब भी आती है..
छोड़कर आती हैं
वहीं पर दुखों और
पीड़ाओं की पोटली !
खुशी का संदेशा लाती हैं
हंसतीं हैं …मुस्कुराती है
सचमुच। पोस्ट ऑफिस की
डाक होती हैं बेटियां…!!

सचमुच…
कितनी चालाक होती
हैं बेटियां…!!
बड़ी चालाक होती हैं बेटियां !!

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