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बालकृष्ण को राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज का चेयरमैन बनाए जाने पर कमिश्नर ने दी बधाई

(आनन्द कुमार)

मऊ। करो कुछ ऐसा कि जमाना याद करें, करो कुछ ऐसा कि जमाने का कुछ कल्याण हो, जी हां इन्ही पंक्तियों को चरितार्थ करते हैं मऊ के सफल उधमी एवं पूर्वांचल व उत्तर प्रदेश में अपने व्यवसाय का लोहा मनवा चुके बालकृष्ण थरड। कंक्रीट, सीमेंट व लोहे के तारों से घर की चौखट व खिड़कियां, स्कूल के डेस्क- बेंच तथा चौकी एवं आकर्षक डिजाइनदार सार्वजनिक प्लेस पर लगाई जाने वाली कुर्सियों के निर्माण कर बालकृष्ण थरड ने जो पहचान बनाई थी उस पहचान को शासन ने न सिर्फ सम्मानित करने का काम किया है बल्कि मऊ के युवा को एक ऐसा पद देकर मऊ के एक-एक व्यक्ति को ही नहीं आजमगढ़ व बलिया को भी सम्मानित किया है।

इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार की जितनी भी तारीफ की जाए कम है आपको बताते चलें कि पूर्वांचल के प्रसिद्ध उद्यमी एवं समाज सेवी बालकृष्ण ठरड को राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज आजमगढ़ का चेयरमैन (प्रशासनिक) बनाये जाने पर आजमगढ़ मण्डल के कमिश्नर जगत राज ने मंगलवार को मण्डलीय उद्योग बन्धु की बैठक में श्री थरड को सम्मानित किया। मंडलायुक्त जगत राज ने बालकृष्ण ठरड को आगामी सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा की इनके नेतृत्व में राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज आजमगढ़ एक नया आयाम स्थापित करेगा।

इस अवसर पर संयुक्त आयुक्त उद्योग  चतुर्वेदी ने बालकृष्ण ठरड का अभिनन्दन करते हुए कहा कि एक उद्यमी का इस पद पर जाना हम सभी के लिए खुशी एवं गौरव की बात है। लघु उद्योग भारती के तमाम सदस्यगणों नें अपने बीच के सरल एवं हंसमुख स्वभाव की सहयोगी प्रकृति के उद्यमी बालकृष्ण ठरड को चेयरमैन बनाये जाने पर हर्ष व्यक्त किया। बालकृष्ण थरड को यह दायित्व उत्तर प्रदेश सरकार के प्राविधिक एवं शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन के अनुरोध पर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिया गया है। सभी ने एक स्वर में उत्तर प्रदेश शासन का आभार व्यक्त किया। लघु उद्योग भारती मऊ के अध्यक्ष भरत कुमार ठरड ने बालकृष्ण ठरड को चेयरमैन बनाये जाने पर बालकृष्ण ठरड को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया। बधाई देने वालों में उपायुक्त जिला उद्योग केन्द्र राजेश बोमन, सुशील अग्रवाल, पत्रकार ब्रम्हानन्द पाण्डेय, सौरभ मद्धेशिया, जितेन्द्र राखोलिया, राकेश यादव, आजाद यादव, कृष्णा सिंह, विनीत कुमार, अभिमन्यु अग्रवाल, अनुराग रूंगटा, संतोष राजवती, बल्लभ दास गुजराती, मंटू जायसवाल आदि लोग रहे। विदित हो कि बालकृष्ण ठरड सन् 1993 में इलेक्ट्रोनिक एण्ड कम्यूनिकेशन से बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री लेने के बाद बालाजी चौखट के नाम से पूर्वी उत्तर प्रदेश को लकड़ी का विकल्प सीमेंट-कंक्रीट की चौखटो के रूप में दिया। 

इनके प्रयास से पूर्वी उत्तर प्रदेश में सैकड़ो की संख्या में छोटे-बड़े उद्योग सीमेंट-कंक्रीट की चौखट के उत्पादन में लगे हुए है। जिससे प्रतिवर्ष लाखो पेड़ कटने से बच रहे है एवं हजारों परिवार को रोजगार प्राप्त हो रहा है। 

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