खेती किसानी : प्याज की रोपाई के लिए 15 दिसम्बर के बाद का समय उपयुक्त : एसएन सिंह
■ प्याज की अच्छी पैदावार को लेकर कृषि वैज्ञानिक एसएन सिंह से अपना मऊ संवाददाता की बातचीत
बिल्थरारोड /बलिया। देश में उगाई जाने वाली सब्जियों में प्याज का महत्वपूर्ण स्थान है। आज इसकी मांग में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। वर्तमान समय में क्षेत्रीय किसान प्याज की नर्सरी डालने के कार्य में लगे हुए हैं।इसकी अच्छी पैदावार के लिए नर्सरी डालते समय विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है।
आज पूरे देश में प्याज की बढ़ती कीमत को लेकर उबाल है। बढ़ती कीमतों ने केन्द्र व राज्य सरकारों की नींदे उड़ा दी है। वर्तमान स्थिति को देखकर प्याज के महत्व को बखूबी समझा जा सकता है। अपना मऊ द्वारा प्याज की खेती को लेकर किसानों द्वारा वर्तमान समय में बरती जाने वाली आवश्यक सावधानी के बारे में जब कृषि वैज्ञानिक एस0एन0सिंह से बातचीत की गयी तो उन्होने जानकारी दी कि नर्सरी डालने के पूर्व बीज को भिगोते समय ट्राईकोडर्मा की 10 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर इसमें बीज को भिगोया जाय।
नर्सरी के क्यारी में भी इसका प्रयोग कर गुड़ाई करके मिट्टी में मिला दिया जाये। तत्पश्चात बीज को क्यारी में डाला जाए। इसका लाभ यह होगा कि इससे हानिकारक फफूंदों से बीज सुरक्षित रहेगा, जमाव अच्छा होगा तथा नर्सरी में रोग नहीं आयेगा। श्री सिंह ने बताया कि वैज्ञानिक शोध में यह स्पष्ट हुआ है कि 15 दिसम्बर से पूर्व प्याज की रोपाई करने पर फूल वाले डंठल अधिक निकलते हैं जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। बताया कि प्याज की रंगीन किस्मों का ही बीज के रूप में प्रयोग करना चाहिए क्योंकि इनमें फिनालिक अम्ल होने के कारण रोग का प्रकोप कम होता है। रोपाई के लिए श्री सिंह ने 50 दिनों की नर्सरी को उपयुक्त बताया। एक किग्रा बीज 8 विस्वा खेत के लिए पर्याप्त होता है। उन्होने प्याज की सीधी बुआई पर बल देते हुए कहा कि सीधी बुआई से 350 कुन्तल प्रति हेक्टेयर की उपज प्राप्त होती है।

