वोट देकर सदन में भेजिए या फिर कफ़न देकर शमशान !

@ डॉ अरविंद सिंह…
तीन दशक में जिस शख्स का इस चुनावी राजनीति ने सब कुछ छिन लिया. बेटा, पत्नी और सिर ढ़कने का उसका घर तक भी, सब कुछ तो उससे छिन लिया इस चुनावी राजनीति ने, अगर बचा है तो बस उसका ईमान, उसकी लोकतंत्र में आस्था, उसकी बेचारगी और दीनता, जिस पर आप तरस खाइए या फिर उसे कफ़न दे दीजिए. मुबारकपुर निवासी बनवारी राम को दो दशक से जानता हूँ. तकदीर भला किसी के साथ ऐसा भी मजाक करती है. बमुश्किल हजार से कम मतों से रह मुहम्मदाबाद गोहना से विधायक बनते-बनते रह गये, दलित समाज से आने वाले इस प्रत्याशी को अपने जीवन में इतना बड़ी परीक्षा देनी पड़ेगी, शायद सोचकर ही रुह कांप जाती है. फिर यह हिम्मत नहीं हारे और इस बार भी मैदान में आ खड़े हुए हैं
लेकिन इस बार कांग्रेस पार्टी से मऊ जनपद के मुहम्मदाबाद गोहना सुरक्षित सीट से यह उनका आखिरी चुनाव होगा, जनता जनार्दन की अदालत में इंसाफ के लिए गुहार लगा रहे यह बुजुर्ग आखिरी बार भाग्य आजमा रहे हैं. जनता को इनकी बात सुननी चाहिए और उनकी अपील और उसमें छिपे दर्द कि दास्ताँ को पढ़नी चाहिए. ईश्वर न करें किसी को बनवारी राम बनना पड़े…!




