आरबीएसके के अंतर्गत मास्टर अरविन्द को मिली नई जिंदगी
गरीब माता-पिता के बचे लाखों रुपये

मऊ। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत रानीपुर ब्लॉक की टीम द्वारा कुछ दिन पूर्व न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट से ग्रसित एक बच्चा मास्टर अरविंद की सूचना मिली। जिसका हाल ही में बीएचयू में निःशुल्क सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया। मास्टर अरविंद के सफल इलाज से उसका परिवार बहुत खुश है। मास्टर अरविंद पूरी तरह से स्वस्थ है और अब वह सामान्य बच्चों की तरह अपनी ज़िन्दगी जी रहा है। शासन प्रशासन के चलाए जा रहे अभियान से अरविन्द के आंगन में खुशियों सा माहौल है।
रानीपुर ब्लॉक के कुसौट ग्राम पंचायत के रहने वाले अरविंद चौहान के नवजात बेटे मास्टर अरविंद को जन्म से ही एक गंभीर विकृति से ग्रसित था। रानीपुर में 30 अगस्त 2021 को संस्थागत प्रसव में डाक्टर के द्वारा बच्चे में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट नामक गंभीर विकृति परिलक्षित हुई। जिसकी गंभीरता को देखते हुए नवजात को तुरंत जिला महिला चिकित्सालय के एसएनसीयू के लिये रेफर कर दिया। जहां से उसे बीएचयू के लिये रेफर किया गया। टीम ने भर्ती करने के कुछ दिनों के बाद 09 अक्टूबर 2021 को मास्टर अरविंद का सफल ऑपरेशन किया। डिस्चार्ज होने के बाद, अब वह मृत्यु को मात दे, कष्ट भरी जिंदगी को अपने परिवार के गोद में खेल रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्याम नरायन दुबे ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत निःशुल्क प्रबंधन के जरिए जन्मकाल से लेकर 18 वर्ष तक की आयु वाले बच्चों के लिए 38 प्रकार के चयनित स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं। इसके अंतर्गत 4-डी यानि जन्मजात दोष, कमियां, बाल्यावस्था से जुड़ी बीमारियों तथा विकासात्मक विलंब के कारण बच्चे की असमय मृत्यु को कम करने एवं सामान्य जीवन जीने हेतु राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है, जिससे शिशु मृत्यु-दर में कमी लायी जा सके, साथ ही कार्यक्रम की गुणवत्ता में सुधार कर अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित किया जा सके।
डॉ श्याम नरायन दुबे ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान गर्भवती को फोलिक एसिड खाने से बच्चों को इस जन्मजात रोग से बचाव होता है। यह बीमारी रीढ़ की हड्डी के उपर गाँठ की तरह हो जाती है जिसके बाद में बढ़ते-बढ़ते भयावह रूप ले लेती है। यह रोग बच्चे की मृत्यु कारण भी बन सकता है। इस विकृति का इलाज एक साधारण परिवार के खर्च से परे है। बच्चों के न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट जैसे रोग का क्रिटिकल आपरेशन प्रदेश में आरबीएसके के अंतर्गत सिर्फ पांच जगह पर होता है, पहला लखनऊ का केजीएमयू और दूसरा रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज झाँसी, तीसरा सैफई मेडिकल कॉलेज, मेरठ मेडिकल कॉलेज के साथ बनारस के बीएचयू में किया जाता है। न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट के दोष का बच्चा पैदा होता है तो तुरंत अपने निकटवर्ती राजकीय स्वास्थ्य के केंद्र पर संपर्क करना चाहिये जिससे बच्चे को इलाज का लाभ मिल सके, इसमें आने वाला पूरा खर्च सरकार वहन करती है।
उप चिकित्सा अधिकारी आरबीएसके के नोडल डॉ श्रवण कुमार के निर्देशन में कार्यरत डीईआईसी मैनेजर अरविन्द वर्मा सफल आपरेशन के कारण आत्मविश्वास से लबरेज हैं, उन्होंने जानकारी दिया कि बीएचयू पहुँचने के बाद मरीज के साथ एक परिजन के रहने एवं गंभीर विकृति के इलाज और दवा व भोजन इत्यादि का पूरा खर्च सरकार उठाती है। जिले में आरबीएसके की कुल 09 ब्लॉक में 18 टीमें कार्य करती हैं। सामान्य काल में यह टीमें सभी ब्लॉक के सरकारी स्कूलों वर्ष में एक बार एवं आंगनबाड़ी में वर्ष में दो बार विजिट कर स्क्रीनिंग करती हैं। यहाँ से जन्मजात विकृति से ग्रसित मिलने पर इलाज के लिए जिला चिकित्सालय और गंभीर विकृति की स्थिति में रेफर के लिए बड़े सरकारी अस्पतालों अथवा मेडिकल कालेज में भेजा जाता है। वापस आने पर टीम अपने अपने क्षेत्रों के लाभार्थियों की मानीटरिंग भी करती है।
मास्टर अरविंद की चिकित्सा में शामिल स्थानीय टीम में डॉ फिरोज एवं डा अशोक, स्टाफ़ नर्स मंजू, पैरामेडिकल स्टाफ़ राम शकल शामिल रहे,टीम के ग्रुप लीडर डॉ फिरोज अहमद ने बताया कि न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट क्या है बच्चों को पहचानने का कार्य किया जाता है। यह दिमाग, स्पाइनल कॉर्ड और रीढ़ की हड्डी की जन्मजात विकृति है। यह तब दिखता हैं जब दिमाग और रीढ़ की हड्डी में ऐसा विकार बन जाए कि यह पूर्ण रूप से बंद होने में विफल हो जाए। न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट रोग गर्भावस्था के पहले 5 हफ्तों में ही हो जाता है तथा यह बहुत गंभीर तथा जन्मजात रोग है। अगर इसके इलाज की शुरुआत बच्चे के जन्म के 24 घंटे के अंदर न हो तो बच्चे की मृत्यु भी हो सकती है। अगर बच्चे को इलाज़ मिला तो वह बच सकता है। अगर बच्चे का सही समय पर इलाज़ न हुआ और तब भी जान बच गई तो वह विभिन्न प्रकार की शारीरिक अथवा मानसिक विकलांगता का शिकार हो सकता है।
न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट कैसे पहचानें?
यह जन्मजात एवं शरीर के बाहरी अंग में होता है जिसे आसानी से देखकर पहचाना जा सकता है, तदोपरांत कुछ जांच के बाद कंफर्म हो जाता है।
1- ढूँढे सूजन (गांठ) कहाँ हैं। ज़्यादातर वह सिर या पीठ पर होगी 2- उभार का रंग, आकार देखना चाहिए 3- ढूँढे कि सूजन से कोई स्राव/रक्तश्राव तो नहीं हो रहा 4- देखे कि बच्चे के पैर ठीक से काम करते हैं या नहीं 5- यह भी देखे कि वह मल त्याग करता है या नहीं।

