आदिवासी समाज के बीच पंहुचे एके शर्मा कहा इनके उत्थान से ही देश का सर्वांगीण विकास सम्भव

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य, पूर्व आईएएस अधिकारी ए. के. शर्मा उत्तर प्रदेश के सुदूर क्षेत्र के कई दिनों के प्रवास पर थे। इस दरम्यान उन्होंने प्रयागराज, भदोही, मिर्जापुर जनपदों में प्रवास करने के उपरांत सोनभद्र जिला मुख्यालय से सुदूर बसे चोपन विकासखंड के ग्राम पंचायत जुगैल गाँव के पचपेड़िया मजरा जैसे दुर्गम एवं दुरूह क्षेत्र में जाकर आदिवासी समुदाय के लोगों से मुलाक़ात कर उनकी वास्तविक परिस्थितियों से अवगत हुए।
ए. के. शर्मा को सुनने के लिए दूर-दूर से पैदल चलकर आदिवासी समुदाय के लोग एकत्रित हुए थे। यहां आए गिरिवासी समुदाय की महिलाओं, बालकों एवं दिव्यांगजनों में भी श्री शर्मा को सुनने एवं देखने को लेकर गज़ब का उत्साह देखने को मिला।
ए.के. शर्मा को अपने बीच पाकर ग्रामीण इतने खुश एवं भावुक थे कि पूरा क्षेत्र “ए. के. शर्मा जिन्दाबाद” के नारों से गुंजायमान हो जा रहा था।
पहाड़ पर हज़ारों-हज़ार लोगों की मौजूदगी ए. के. शर्मा के प्रति उनके प्रेम, विश्वास एवं स्नेह को प्रदर्शित कर रहा था।
बनवासी गिरिवासी जनसंवाद को सम्बोधित करते हुए ए. के. शर्मा ने कहा कि पिछले 7 साल में यहां के लिए जितना कार्य हुआ है, उतना 70 सालों में नहीं हो पाया था। यह प्रदेश का सुदूर एवं दुर्गम स्थान है। सूबे की पूर्व की सरकारों ने यहां के लिए कुछ नहीं किया। जनहित में यहां अभी बहुत कुछ कार्य करने की आवश्यकता है। पर्यटन के क्षेत्र में यहां बहुत ज्यादे कार्य हो सकता है। झरनों के पानी को रोकने की व्यवस्था होनी है। यहां बिजली भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार में ही पहुँची है। इस क्षेत्र के विकास के लिए हर सम्भव कार्य करूँगा। जल्द ही हर घर-हर गॉव में पीने का पानी भी पहुँच जाएगा।
कार्यक्रम के दरम्यान ही ए. के. शर्मा आदिवासी समाज के लोगों के बीच में जाकर बैठ गए और उनसे भोजपुरी में बात करते हुए उनकी समस्याओं से रूबरू हुए। उन्होंने वहां मौजूद सभी आदिवासियों को कम्बल वितरित किया एवं उनकी सभी समस्या के समाधान का आश्वासन दिया। ए. के. शर्मा की यही उदारता उन्हें अन्य नेताओं से भिन्न तथा आमजन के बीच लोकप्रिय बनाती है।
वहां के स्थानीय लोगों के अनुसार ए. के. शर्मा पहले ऐसे नेता हैं जो जुगैल जैसे अति पिछड़े क्षेत्र में आये हैं जहां न तो मोबाईल का नेटवर्क है और न ही इस सरकार से पहले बिजली और सड़क थी। पहाड़ों के बीच में वहां के स्थानीय आदिवासी समुदाय के लोग थे और उनके बीच गॉवों तक बिजली के तार, गॉवों-घरों तक पानी पहुँचाने वाली योजना में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले ए के शर्मा। ऐसे में आदिवासी समुदाय के लोगों के लिए उम्मीद और भरोसे की आस बनकर ए. के. शर्मा पहुँचे थे।
