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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मऊ ने बलिदान दिवस पर किया उन्मुखीकरण कार्यक्रम

मऊ। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा 23 मार्च बलिदान दिवस के अवसर पर बाल कारागार के सभागार में महान क्रांतिकारी भगत सिंह सुखदेव एवं राजगुरु द्वारा मातृभूमि के लिए किए गए सर्वोच्च बलिदान को याद कर उनके विचारों को प्रस्तुत कर उन्मुखीकरण किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि प्रवास पर रहे गोरक्ष प्रांत के प्रांत संगठन मंत्री हरिदेव जी, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुधांशु सिंह जी, जिला संगठन मंत्री अनूप भारत जी, कार्यक्रम संयोजक- शशिकांत मंगलम (जिला संयोजक), कार्यक्रम सहसंयोजक- अविनाश गुप्ता (जिला मीडिया संयोजक) व अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे । प्रवास पर रहे गोरक्ष प्रांत के प्रांत संगठन मंत्री हरिदेव जी ने ज्ञान की देवी मां सरस्वती और युवाओं के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद जी को द्वीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। मुख्य अतिथि हरदेव जी ने कहा आज देश स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद कर रहा है उनके विचार जो पहले भी प्रसांगिक थे वह वर्तमान में भी प्रसांगिक है इस प्रकार उन्होंने समाज में व्याप्त शोषण, अराजकता, वर्ग भेद, आदि स्थितियों पर भगत सिंह के सेंट्रल जेल मैं रहने के दौरान लिखें लेख “मैं नास्तिक क्यों हूं ” पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुधांशु जी ने बताया कि भगत सिंह के विचार ही वे हथियार थे जिनकी बदौलत शहीद भगत सिंह का संपूर्ण जीवन देश और दुनिया के अविस्मरणीय बन गया। भगत सिंह के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खासियत उनके विचार ही हैं। क्रांति की ज़रूरत उन्होंने कभी बम-बारूद के दम पर महसूस नहीं की बल्कि वे तो कहा करते थे- ‘बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं आती।

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