राजभवन में महामहिम को स्वामी सहजानंद सरस्वती सम्मान से नवाजा गया
◆ भारत में प्रत्येक वर्ष 12 हजार किसान करते है आत्महत्या: गोपाल राय
लखनऊ। राष्ट्रीय क्रान्तिकारी समाजवादी पार्टी द्वारा सोमवार को लालकुआं स्थित पार्टी कार्यालय पर स्वामी सहजानंद सरस्वती की जयंती मनायी गयी, इसके पुर्व सहजानंद सरस्वती जी के पुण्यतिथि के पूर्व संध्या पर लखनऊ के राजभवन में महामहिम राज्यपाल को स्वामी सहजानंद सरस्वती सम्मान से नवाजते हुए राष्ट्रीय क्रान्तिकारी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय ने कहा कि किसानों के मसीहा स्वामी सहजानंद किसानों को शोषण मुक्त करने और जमींदारी प्रथा के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए 26 जून, 1950 को महाप्रयाण कर गये। उनके जीते जी जमींदारी प्रथा का अंत नहीं हो सका, लेकिन उनके द्वारा प्रज्जवलित ज्योति की लौ आज भी बुझी नहीं है। आजादी मिलने के साथ ही जमींदारी प्रथा को कानून बनाकर खत्म कर दिया गया। लेकिन प्रकारांतर से देश में किसान आज भी शोषण-दोहन के शिकार बने हुए हैं। कर्ज और भूख से परेशान किसान आत्महत्या कर रहे हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि देश भर की भूख शांत करने वाला आज खुद भुखा मर रहा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता गोपाल राय ने की, कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी सहजानंद के तस्वीर पर पुष्पार्चण कर हुआ। मौके पर मौजूद लोगों ने स्वामी सहजानंद के व्यक्तित्व और कृतत्व को याद करते हुए उनके बताये मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। ज्ञातव्य हो कि भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में देश के कोने- कोने से किसानों को संगठित कर स्वतन्त्रता आन्दोलन को विशाल स्वरूप प्रदान करना स्वामी सहजानन्द सरस्वती का एक अभिनव प्रयोग था। उन्होने कहा कि स्वतन्त्रता के पश्चात सत्ता की राजनीति ने किसानो को हाशिए पर धकेल दिया। जिसके वजह से भारत में प्रत्येक वर्श 12 हजार किसान आत्महत्या करते है। जो भी राजनीतिक पार्टिया सत्ता में आयी, किसांनो को वोट के रुप में मोहरा बनाकर उनका षोशण करती रही । किसान लोग आज भी जुल्म, दमन, अत्याचार व उपेक्षा के शिकार बने हुए है। आर्थिक तंगी व बदहाली से आज भी किसान जूझ रहें है।
इतिहास गवाह है कि राष्ट्र की अस्मिता व प्रभुसत्ता की रक्षा के लिए छेड़े गये हर आन्दोलनो में किसानों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया । आज भी सेना में किसानो के ही सर्वाधिक बेटे है जो देष की रक्षा के लिए शहीद हों रहे, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि राष्ट्र को स्वावलम्बी व आत्मनिर्भर बनाने वाला किसान आज न तो अपने बेटो को अच्छी तालिम दे सकता हे और न ही अच्छी जिन्दगी जी सकता है। उन्होनें कहा कि आज व्यापारीयों को माफिया व सरकारी अफसरों ने ऐसे अपनी गिरफ्त में कर लिया है कि व्यापारीगण ठीक ढ़ग से जीने के लिए सांस नहीं ले पा रहा है। जहाॅं एक ओर व्यापार कर, इनकम टैक्स व अन्य तरह कै टैक्स से व्यापारी पीड़ीत है, वहीं दबंगों द्वाराजबरन वसुली की जाती है एैसे में व्यापारी बन्धुओं को एक जुट होकर अपने हक की लड़ाई के लिए संघर्श की जरूरत है। किसी भी व्यापार में मजदूरों की भुमिका बहुत ही महत्वपुर्ण होती है ,चाहे वह जनरल स्टोर हो या उद्योग-धन्धे, फैक्ट्रीयां व अन्य बिजनेस में व्यापारी व मजदुरों को मिलाकर ही विकास किया जा सकता है ।जरुरत है किसानो को एकसूत्र में पिरोने की ,उन्हे संगठित करने की।
देश में बढ़ती हुई बेरोजगाारी पर चिन्ता व्यक्त करते हुए श्री राय ने कहा कि रोजगार न मिलने से बेरोजगार युवक अपराधी बनता जा रहा है। देश में चीनी मिले चालू न होने से किसानो के गन्ने खेत में ही सड़ रहे है । आज की स्थिति यह है कि एक अरब आबादी की भूख षान्त करने वाला किसान स्वंय भूखो मर रहा हैं। वैज्ञानिक क्रान्ति के इस युग में भी किसान कहीं भूखों की मार झेल रहा है तो कहीं बाढ़ से विलुप्त है । कहीं आर्थिक तंगी से आत्महत्या करने को मजबूर है तो कहीं अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है । भारतीय किसान आन्दोलन के जनक स्वामी सहजानन्द सरस्वती ने कहा था रोटी भगवान है, रोटी पैदा करने वाला किसान भगवान से भी बढ़ कर है। कार्यक्रम में नेहा राय, रोशनलाल गुप्ता, किशन लाल विजय राय, नीतु सिंह व अन्य लोग उनस्थित थे।

