यक्ष प्रश्न : आखिर कब तक होगा ग्राम न्यायालय का संचालन
(अशोक जायसवाल)
◆ 17 फरवरी 14 को केन्द्र सरकार द्वारा बिल्थरारोड सहित प्रदेश में 12 ग्राम न्यायालयों की स्थापना की हुई थी घोषणा
◆ अधिकारियों की उदासीनता से ग्राम न्यायालय की स्थापना बनी दूर की कौड़ी
◆ जिलाधिकारी भवानी सिंह खगरौत द्वारा किये गये पहल के बाद एक बार फिर ग्राम न्यायालय के लिए सरगर्मीशुरू
बिल्थरारोड/बलिया। क्षेत्र के लोगों को शीघ्र न्याय सुलभ कराने हेतू प्रदेश सरकार द्वारा विगत वर्षों से ग्राम न्यायालय स्थापित करने की योजना को स्थानीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते मूर्त रूप नही दिया जा सका है। केन्द्र सरकार द्वारा विगत 17 फरवरी 14 को बिल्थरारोड सहित प्रदेश में 12 ग्राम न्यायालय का शुभारम्भ करने के घोषणा के बावजूद यह फिलहाल अधर में ही लटका हुआ है। इस सम्बन्ध में भाजपा के प्रांतीय परिषद सदस्य द्वारा जिलाधिकारी को अवगत कराने पर उन्होने एसडीएम से तत्काल ग्राम न्यायालय शुरू करने की दिशा में सार्थक पहल करने का निर्देश दिया। एसडीएम ने भूमि न मिलने तक जिला पंचायत के डाकबंगले में अस्थायी रूप से ग्राम न्यायालय संचालित किये जाने का प्रस्ताव डीएम को भेज दिया है।
केन्द्र सरकार द्वारा लोगो ंको सस्ता न्याय दिलाने के लिए ग्राम न्यायालयों की स्थापना निर्णय फिलहाल स्थानीय अधिकारियों के चलते ठंडे बस्ते की षोभा बन चुका है। जिला मुख्यालय से 65 किमी दूर स्थित बिल्थरारोड में साढ़े तीन वर्ष पूर्वजब ग्राम न्यायालय की स्थापना की खबर क्षेत्रवासियों को मिली तोवे खुशी से झूम पड़े। केन्द्र सरकार द्वारा न्यायालय स्थापना को लेकर 6.27 करोड़ रूपये की धनराशि भी जारी कर दी गयी। जिला जज सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने बकायदा भूमि चिन्हित करने के लिये कई स्थानो का निरीक्षण भी किया। यहां तक की इसके लिए 21 जुलाई 2015 बकायदा अपर सिविल जज जूनियर डिविजन लाल बहादुर गौड़ की नियुक्ति भी कर दी गयी। परन्तु स्थानीय प्रषासनिक अधिकारियों की उदासीनता के चलते न्यायालय स्थापना दूर की कौड़ी ही बनी रही। काफी दौड़-धूप के बाद 3 नवम्बर को भाजपा के प्रांतीय परिषद सदस्य देवेन्द्र कुमार गुप्त ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद के महानिबन्धक से मुलाकात की। महानिबंधक ने कोर्ट क अस्थाईकेअस्थाईरूप से संचालन के लिए 2 कमरा व 1 न्यायालय कक्ष की स्वीकृतिध्प्रस्ताव मिलते ही अधिकारी नियुक्त करने की बात कही। इस सम्बन्ध में तत्कालीन जिलाधिकारी सुरेन्द्र विक्रम द्वारा भी इसकी पुष्टि करतेहुए हुए न्यायालय स्थापना के लिए आगे की कार्यवाही करने की बात कही गयी। परन्तुयहां भी स्थानीय अधिकारियों की उदासीनता आडत्रे आयी तथा भूमि का चिन्हांकन न होने से इसकी स्थापना लम्बित रहा। इस सम्बन्ध में जहां सांसद रविन्द्र कुशवाहा ने 14 दिसम्बर 16 को प्रमुख सचिव विधि उप्र को पत्र भेजा था वहीं विधायक धनन्जय कन्नौजिया ने केन्द्रीय विधि मंत्री को पत्र लिखकर इसे अविलम्ब शुरू कराने की अपील की। 3 अप्रैल को भाजपा नेता ने जिलाधिकारी भवानी सिंह खरगौत से मिलकर ग्राम न्यायालय स्थापना के लिए पत्रक दिया। डीएम ने इसे गंभीरता से लेते हुए एसडीएम बिल्थरारोड को इस सम्बन्ध में कार्यवाही के निर्देश दिये। डीएम के कड़े निर्देश के बाद एसडीएम राधेश्याम पाठक 10 एकड़ भूमि के लिए गुरूवार को माथापच्ची करते नजर आये। अब देखना है यह है कि डीएम के निर्देश के क्रम मेंं क्या स्थानीय प्रशासन इसके लिए गंभीर रूख अपनाता है या एक बार फिर यह ठंडे बस्ते की शोभा ही बनी रह जाती है।
