रचनाकार

राज प्रिया रानी की नज्में : आंखे लड़ेंगी शरमाई एक दूजे के दरमियान जब

@ राज प्रिया रानी…

आसूं हमारे बह न पाए की
तुम कहीं निर्झर बह न सको,
नयन सलाखें बंद रखूं की
ढले तस्वीर से मिट न सको ,
ओ बेखबर, तु रवानगी बन
कहीं मेरे सपनों में न आना ,
कमसिन है सपनों की लड़ी कि
तु करवटों में टूट न सको।
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मोहब्बत में चढ़े कई प्रेम शूली
प्रेम की ताकत चटाते भी धुली
विश्वास की डगर गर चलते रहें
द्वेष की आग में न कभी जलेगी जूली

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चांद जो निकला सितारों के बीच,
तन्हा डटा था वो सवालों के बीच ,
रौशनी भिगाता अरमानों के पुलिंदे,
ये कैसा सहर है जुगनुओं के बीच l
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नींद की कस्ती मैं भी संभालूंगी तुम भी संभालो l
ख्वाबों में संग मैं भी सिमटूंगी तुम भी तो सिमटो ll
आंखे लड़ेंगी शरमाई एक दूजे के दरमियान जब,
चांदनी की चादर मैं भी ओढूंगी तुम भी तो ओढो ।।
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