जातिगत एवं क्षेत्रीय समीकरण के चलते घोसी में बिगड़ रही दिग्गजों की चुनावी गणित

@ रूपेन्द्र भारती घोसी से…
घोसी/मऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बिगुल बजने के बाद घोसी विधानसभा में टिकट आवंटन में मूलभूत सुविधाओं के बजाय जातिगत एवं क्षेत्रीय समीकरण तेजी से प्रबल होती नजर आ रही है। जिसके चलते कई दिग्गज नेताओं के चुनावी समीकरण बिगड़ता नजर आ रहा है। जिसके परिणाम स्वरुप प्रत्याशियों की धड़कने रोज कम और तेज हो रही है। इस संबंध में क्षेत्रीय लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं और कयास लगाए जा रहे हैं। उसके साथ ही एक बार फिर बाहरी भगाओ क्षेत्रीय लाओ की नारे की गूंज शनै: शनै: सुलग रही है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पहले लोगों की मूलभूत सुविधाएं रोटी, कपड़ा और मकान के साथ ही सड़क, सुरक्षा, बिजली एवं पानी की समस्याओें के मुद्दे को लेकर प्रत्याशी अपना चुनाव लड़ते थे परन्तु अब मूलभूत सुविधाओं की समस्या नगण्य हो गयी है। बल्कि जातिगत एवं क्षेत्रीयता प्रमुखता से हावी हो गया है। यही कारण है कि आज सभी दल अपने प्रत्याशियों के टिकट का आवन्टन जातिगत समीकरण को देखते हुए ही आवंटित कर रही है। जिसके परिणाम स्वरुप प्रमुख राजनितिक दलों सक्रिय कार्यकर्त्ता भी अपने दल से टिकट के दावेदारी से बाहर हो जा रहे हैं, जिससे उनका मनोबल गिरता नजर आ रहा है। अब तो क्षेत्रीय लोगों में भी बाहरी भगाओ क्षेत्रीय लाओ के नारे भी लगाते नजर आ रहे हैं। अब देखना है कि भारतीय जनता पार्टी, अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी, बसपा में से कौन सी पार्टी क्षेत्रीय एवं राजनितिक समीकरण को साधने में सार्थक होती है क्योंकि इसके पूर्व समाजवादी पार्टी ने भाजपा से दल बदलने के बाद सम्मिलित होने वाले पूर्व वन मंत्री दारा सिंह चौहान को प्रत्याशी घोषित कर चुकी है तो आम आदमी पार्टी ने ज़िला पंचायत सदस्य पंकज कुमार भारती एवं पीस पार्टी ने तुफैल अहमद को अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है, जबकि बसपा प्रभारी के रूप में विक्रम चौहान को क्षेत्र में भेजा है। वहीं समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी एवं पूर्व वन मंत्री दारा सिंह चौहान के प्रति आम जनता सहित कुछ कद्दावर नेताओं में आक्रोश देखने मिल रहा है। यही कारण है कि आम मतदाताओं की निगाहें बसपा एवं भाजपा प्रत्याशी के ऊपर टीकी हुई है।

