उत्तर प्रदेश

आजमगढ़ से विधानसभा का चुनाव लड़ सकते हैं सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव

अखिलेश यादव

( संदीप अस्थाना )

आजमगढ़। सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव आजमगढ़ सदर सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ सकते हैं। इसके साथ ही आठ बार से यहां से प्रतिनिधित्व कर रहे दुर्गा प्रसाद यादव की छुट्टी हो सकती है। इन स्थितियों के बीच आजमगढ़ में विधानसभा का चुनाव काफी दिलचस्प हो सकता है। आजमगढ़ जिले में विधानसभा की दस सीटें हैं। इस सच को भी नहीं नकारा जा सकता है कि हमेशा से आजमगढ़ समाजवादियों के लिए उर्वरा भूमि रही है। यही वजह है कि समाजवादी राजनीति के पुरोधा चौधरी चरण सिंह हमेशा यह कहा करते थे कि वह बागपत छोड़ सकते हैं मगर आजमगढ़ को नहीं छोड़ सकते हैं। चौधरी साहब के निधन के बाद जब मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी राजनीति की बागडोर संभाली तो उन्होंने भी यही कहा कि उनका दिल सैफई है तो धड़कन आजमगढ़ है। अपने कथन की प्रमाणिकता के लिए वह आजमगढ़ से लोकसभा का चुनाव लड़े और तमाम विपरीत परिस्थितियों के बाद भी जीत दर्ज किए। आगे चलकर जब उनके पुत्र अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी की बागडोर संभाली तो उनका भी लगाव आजमगढ़ के प्रति कुछ कम नहीं हुआ। उन्होंने भी यही कहा कि समाजवादियों का दूसरा घर आजमगढ़ ही है। अखिलेश ने भी अपने कथन की प्रमाणिकता साबित करने के लिए 2019 में आजमगढ़ से लोकसभा का चुनाव लड़ा और भाजपा की आंधी के बावजूद यहां से जीत दर्ज किये, जबकि अपने गृहक्षेत्र में उनके उम्मीदवारों को शिकस्त का सामना करना पड़ा। अब जबकि चाचा शिवपाल के साथ उनका गठजोड़ हो चुका है तथा लोकदल के जयंत चौधरी के साथ गठबंधन भी है तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश को लेकर वह पूरी तरह से निश्चिंत हैं। उनको चिंता बस पूर्वांचल की है। पूर्वांचल में योगी आदित्यनाथ चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव पूर्वांचल को अपने टारगेट पर लिये हुए हैं। उनको यह पता है कि उनके लिए सबसे सुरक्षित सीट आजमगढ़ ही है। यही वजह है कि वह आजमगढ़ की सदर विधानसभा सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ सकते हैं। इसकी रूपरेखा बननी शुरू भी हो गयी है। इसी के तहत इस जिले में सपा से जुड़े युवाओं व छात्रनेताओं को पार्टी के विभिन्न विंग का बड़े से बड़ा पद बांटा जा रहा है। अखिलेश यादव आजमगढ़ से चुनाव लड़कर पूर्वांचल को अपने पक्ष में करने के फिराक में हैं। निश्चित तौर पर उनकी यह योजना कारगर भी साबित हो सकती है।

अनजाने में अखिलेश ने की एक ही गलती…

सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ने अनजाने में इस जिले में एक ही गलती की है। वह गलती यह थी कि वह इस शहर के रमा हास्पिटल में जब आये थे तो उस दौरान पूर्वांचल के ख्यातिलब्ध सामाजिक कार्यकर्ता व अपने पार्टी के पूर्व नेता महाराणा प्रताप सेना के संयोजक ठाकुर विजेन्द्र सिंह के हाथ से पुष्पमाला लेकर उसे फेंक दिये थे। यह सही है कि अखिलेश ने जानबूझ करके यह काम नहीं किया मगर विजेन्द्र सिंह के हजारों समर्थकों ने इसे अपने मुखिया का अपमान माना। सच्चाई तो यह है कि कुछ लोगों ने आगमन के दौरान अखिलेश को यह बताया था कि वह एक विधायक के कहने पर विरोधी दल के लोगों को तवज्जो दे रहे हैं और अपने लोगों को हाशिये पर कर रहे हैं। इसी वजह से अखिलेश उस विधायक से चिढ़े हुए थे और उसी चिढ़ में माला तोड़कर फेंक रहे थे। इसी दौरान विजेन्द्र सिंह सामने आ गये और वह विजेन्द्र सिंह का माला तोड़कर फेंक दिये। इस गलती को सुधारने के लिए अखिलेश यादव को विजेन्द्र सिंह के यहां जाना पड़ेगा और यह कहना होगा कि वह अनजाने में यह गलती किए हैं।

कौन हैं विजेन्द्र सिंह…

ठाकुर विजेन्द्र सिंह मौजूदा समय में महाराणा प्रताप सेना के संयोजक हैं। वह लम्बे समय तक सपा की राजनीति किये और अमर सिंह के अतिकरीबी रहे। बाद के दिनों में अमर सिंह का अपने भाई अरविन्द सिंह के साथ मतभेद हुआ तो उस दौरान अरविन्द सिंह शहर में आकर विजेन्द्र सिंह के शहर के होटल गरूड़ में रूके हुए थे। अमर सिंह ने विजेन्द्र सिंह को फोन करके कहा कि वह तत्काल अरविन्द सिंह को अपने होटल से निकाल दें। विजेन्द्र सिंह ने स्पष्ट तौर पर कहा कि यह क्षत्रिय मर्यादा और सनातन धर्म के खिलाफ कृत्य होगा, ऐसे में वह ऐसा नहीं कर सकते हैं। विजेन्द्र सिंह ने अरविन्द सिंह को अपने होटल से नहीं निकाला। उनको इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा। उस समय सरकार सपा की थी। अमर सिंह ने विजेन्द्र के साथ रिश्ते खत्म कर दिये। इसके साथ ही उनके होटल की चहारदीवारी भी गिरवा दी। साथ ही उन्हें फर्जी मुकदमे में भी फंसाया। इसके बाद भी विजेन्द्र सिंह नहीं झुके। ऐसे स्वाभिमानी व्यक्तित्व के सामने अखिलेश यादव को अनजाने में हुई गलती स्वीकार करके अपने बड़प्पन का परिचय देना ही चाहिए।

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