काम की बात

आरबीएसके योजना : जन्मजात मुड़े पंजों का निःशुल्क हो रहा इलाज

■ मिरेकल फीट इंडिया के सहयोग से 38 बच्चों का चल रहा निःशुल्क उपचार

मऊ। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम ( आरबीएसके) के अंतर्गत जिला चिकित्सालय मऊ में मिरेकल फीट इंडिया के सहयोग से संचालित क्लबफुट (टेढ़े व मुड़े पंजे) क्लीनिक लॉकडाउन के बाद पुनः शुरू कर दिया गया है। इसमें दो वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन के दिशा निर्देशन में प्रत्येक बृहस्पतिवार को निःशुल्क चिकित्सा का लाभ दिया जा रहा है। इसके इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करती है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्याम नरायन दूबे ने बताया कि क्लबफुट एक प्रकार की पैर से सम्बन्धित जन्मजात विकृति होती है, जिसमें जन्म के समय से ही बच्चे का पैर उसके सामान्य आकार का नहीं होता है। दोनों पैर या एक पैर के पंजे अंदर की ओर मुड़ा होता है। यह नवजात शिशुओं में पायी जाने वाली एक विकृति है। यह स्थिति सामान्य भी हो सकती है और कुछ परिस्थितियों में यह स्थिति गंभीर भी हो सकती है । पैर की मांसपेशियों को पैर की हड्डियों से जोड़ने वाले टेंडन्स के छोटे और तंग होने के कारण यह विकृति होती है, जिस कारण शिशु का पैर अंदर की तरफ मुड़ जाता है। इसका इलाज बच्चे के जन्म के पाँच से सात दिन बाद या बच्चे के पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद जितना जल्दी संभव हो शुरू करवाना चाहिए।
ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ अरून कुमार गुप्ता ने बताया – बच्चे का इलाज जितना जल्दी संभव हो सकेगा उतनी ही जल्दी बच्चे का पैर सामान्य हो जाएगा। इस प्रक्रिया में बच्चे को प्लास्टर “पोंसेटि तकनीक” के द्वारा लगता है । इसके बाद टेनोटॉमी की जाती है। फिर बच्चे को विषेश प्रकार के जूते पहनाए जाते है। यह समय-समय पर बदले जाते हैं।


ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ सुबोध चंद्र साप्ताहिक कास्टिंग का उपयोग करते हैं। इस तरह से पैर के क्रमिक सुधार की इस प्रक्रिया को “पोंसेटि तकनीक” कहा जाता है। स्थिति की गंभीरता के आधार पर, यह प्रक्रिया कुछ महीने लम्बी हो सकती है।
आरबीएसके के डीईआईसी मैनेजर अरविंद वर्मा ने बताया – क्लब फूट जन्मजात विकृतियों में से एक है, जिसमें की जन्म के समय से ही बच्चों के पंजे मुड़े होते हैं। जिसमें चिकित्सा के साथ-साथ विशेष जूते और बार के उपयोग की भी आवश्यकता होती है, जोकि मिरेकल फीट इंडिया के द्वारा निःशुल्क चिकित्सा उपलब्ध कराया जाता है। जिले में क्लबफूट क्लीनिक की शुरुआत अगस्त 2019 से हुई। इसके माध्यम से अभी तक 38 बच्चे इलाज पर है।
मिरेकल फीट के जिला संयोजक प्रिंस दुबे ने बताया कि प्रत्येक बृहस्पतिवार को मऊ जिला चिकित्सालय स्थित हड्डी रोग अनुभाग में उपलब्ध रहते हैं, जिनसे लाभार्थी द्वारा सहयोग लिया जा सकता है।
केस – 1 – कोपागंज निवासी मनोज राजभर ने बताया कि उनके घर कुछ दिन पहले आरबीएसके की टीम आई थी, जिन्होंने उनके बेटी सलोनी राजभर (आठ माह) के मुड़े हुए पैर को देखा तो कहा कि आप ही इसका इलाज कराएं तो यह धीरे धीरे ठीक हो जाएगी। यह सामान्य जिंदगी जीने लगेगी। उनकी सलाह पर वह मऊ जिला चिकित्सालय में लेकर आए, यहां पर उसका इलाज शुरू हो गया है जिसका कोई पैसा नहीं लग रहा है। उम्मीद है कि मेरी बेटी एक सामान्य जिंदगी जी सकेगी।
केस – 2 – मोहम्मदाबाद गोहना निवासी सुनीता यादव ने बताया कि उनकी बेटी परी यादव (तीन माह) के जन्म से ही टेढ़े पंजे की समस्या थी और वह इसके ठीक होने की आस खो चुकी थी। लेकिन एक दिन गांव में एक डॉक्टर लोगों की टीम आई जिन्होंने मेरी बेटी को देखकर कहा कि इसका इलाज कराइए यह ठीक हो जाएगी। तो मैंने कहा कि हमारे पास इतना पैसा कहां है कि इसका इलाज करा सके। डॉक्टर ने कहा कि आप जिला चिकित्सालय मऊ लेकर आइए पूरा इलाज नि:शुल्क है। हम लोग जिला चिकित्सालय लेकर आए जहां पर डॉक्टर साहब लोगों ने इसके पैरों पर पट्टी और प्लास्टर लगाया। मेरी परी अब ठीक से चलने लगेगी इतना अब मुझे विश्वास है।

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