मिसाल-ए-मऊ

मऊ के रामायण यादव भारत सरकार में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग में सलाहकार के रूप में दे रहे सेवा

( आनन्द कुमार )

दिल्ली। अपनी माटी की सोंधी महक जब देश की राजधानी के माध्यम से पूरे देश में फैली हो तो उसकी खुशबू से मऊ का जर्रा-जर्रा गुलजार होना लाजिमी है। 1996 से देश में भारतीय विधि सेवा में अधिकारी मऊ जनपद के घोसी ब्लाक के ग्राम गोड़सरा निवासी स्व. कुबेर नाथ यादव व स्व. राजमुनी देवी के पुत्र रामायण यादव की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। देश के नामचीन ईमानदार विधि अफसरों में से एक रामायण यादव की इसी लोकप्रियता और सादगी की बदौलत मऊ को अपने बेटे पर नाज है। वर्तमान में रामायण यादव सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार में जून 2014 से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग में सलाहकार के रूप में सेवा दे रहे हैं। आपकी पहचान अलग व ईमानदार कार्यशैली भी है। इसके पूर्व आप आप सीबीआई, पूर्व विधि सलाहकार, रेलवे बोर्ड में दो बार सेवा दिए है ।
पूर्व अपर सचिव विधि व न्याय मंत्रालय, पूर्व सदस्य विधि अग्रिम विनिर्णय प्राधिकरण वित्त मंत्रालय ,भारत सरकार में रहे हैं।
रामायण यादव की हाईस्कूल तक पढ़ाई स्थानीय गांव लुदुही में हुई है। उसके बाद आपने वाराणसी बीएचयू से पढ़ाई किया। आप निर्भया सेना के विधि न्याय समिति के चेयरमैन हैं। आपके छोटे भाई डा. के.के. यादव भुड़सुरी रतनपुरा में मर्यादा पुरुषोत्तम पीजी कालेज में असिस्टेन्ट प्रोफेसर हैं।
श्री यादव ने छात्र छात्राओं को अपने संदेश में कहा कि पढ़ाई कभी बेकार नहीं जाती, यह अनमोल धन है सदैव काम आता है। कम नंबर आए तो घबड़ाए नहीं, उसी मेहनत और लगन से लगे रहे। टैलेन्ट को बढ़ाएं हार नहीं माने। इसलिए पढ़े और कम नंबर को लेकर मायूस न हों, बस जुनून व दृढ़संकल्प के साथ आगे बढ़ते रहे, निःसंदेह आपको कामयाबी मिलेगी व आप अपने मकशद में कामयाब रहेंगे ।
श्री यादव ने कहा कि मेरा गांव से विशेष लगाव रहता है । भला अपनी जन्मभूमि किसे अच्छी नहीं लगती ।
मेरे लिए भी गर्व का विषय है कि मैं भी प्रभु श्रीराम व माता जानकी के पुत्र लव कुश की जन्मस्थली मऊ में पैदा हुआ हूँ । बातचीत के दौरान श्री यादव ने मऊ में एक विश्वविद्यालय तथा मेडिकल कालेज भी खोले जाने वकालत की।

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