रचनाकार

कवि और कवत्रियों ने पिता पर पढ़ी एक से बढ़कर एक रचनाएँ

पितृ दिवस पर ऑनलाइन ज़ूम कवि सम्मेलन सम्पन्न

इंदौर। श्री काव्य सागर साहित्यिक संस्था (पंजी.) इंदौर के बैनर तले ऑनलाइन ज़ूम कवि सम्मेलन का आयोजन रविवार को दोपहर 3 बजे से किया गया। संस्था सदस्यों के साथ प्रदेश और अन्य प्रादेशिक कवि-श़ायरों ने बेहतरीन रचनाएँ पढ़कर दाद बटोरी। विशेष बात यह रही कि देश-विदेश के श्रोता गणों ने घर बैठे कवि सम्मेलन का आनन्द लिया। आ. सतीश पाटनी अपने परिवार सहित अफ्रीकी देश केन्या से आयोजन में सम्मिलित हुये lआपने कार्यक्रम की भूरी-भूरी प्रशंसा की। आ. सरिता साक्कले श्रोता अतिथि के रूप में उपस्थित थी। मुख्य अतिथि आ. दिनेश शर्मा जी ने उम्दा आयोजन की सभी कलमकारों को बंधाई दी। संचालन रश्मि दुबे आभा (भोपाल) ने किया। आभार प्रदर्शन आरती गेहलोद (भोपाल) ने किया। कवि सम्मेलन में आ. बृजमोहन शर्मा ‘बृज’ (इंदौर), आ. रश्मि दुबे ‘आभा’ (भोपाल), आ. आरती गेहलोद (भोपाल), आ. दीपक कटकानी (झाबुआ), आ. मक़सूद शाह (देवास), मनोहरलाल सोनी ‘बाबा’ (इंदौर), आ. अमन राठौर ‘मन’ (बैतूल), आ. अभिषेक कौशल (लखनऊ), अविनाश यादव (इंदौर), आ. सुनीता राजेश परसाई (होशंगाबाद) आदि ने काव्यपाठ किया। यह जानकारी संयोजक जितेन्द्र शिवहरे ने दी।

कवियों द्वारा पढ़ी गयी रचनाएँ-

हमारे सर की पगड़ी वो हमारे ताज होते हैं,
घर की सल्तनत के तो पिता महाराज होते हैं,
हमारी थाम कर उंगली हमें चलना सिखाते हैं
पिता की आंख के तारे हम ही युवराज होते हैं।

बृजमोहन शर्मा बृज (इंदौर)

पापा, आज भी यही आस है, मन को यही प्यास है,
आप भले ही दूर बहुत हो, किंतु ! दिल के बहुत पास हो।

रश्मि दुबे ‘आभा’ (भोपाल)

नाम मुझको भी मिल जाए मगर नहीं भाता
ज़मी पर गैर की फसल उगाना नहीं आता
यकीं मुझको है अपने अल्फा़जो पर
किसी के हर्फ पे उँगली उठाना नहीं आता

दीपक कटकानी (झाबुआ)

जल्द कोरोना जाएगा खुशियाँ देश मनाएगा
बड़े सबेरे गुड़िया के संग मुन्ना स्कूल जाएगा

कवि मनोहरलाल सोनी ‘बाबा’ (इंदौर)

लगता है कि भोर हुई है
शोर हुआ है
चहचहाट हुई है
तुषार माटी की भेंट हुई है
सुगन्धित मनोरक कोई तरंग छुई है
ह्र्दयविचारक बात हुई है
लगता है कि भोर हुई है।

अमन राठौर मन (बैतूल)

वक़्त आज़ का, कल एक किस्सा होगा और हम उस किस्से के किरदार होंगे। किरदार हमने जैसा भी निभाया वह कल की नींव होगी।

आरती गेहलोत (भोपाल)

मन चाहा मिले ज़रूरी तो नहीं
हर ख्वाब सच हो ज़रूरी तो नहीं

अभिषेक कौशल लखनऊ (उप्र)

रात के सन्नाटे में अंधियारों को चीरता।
अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर, चलता है निडर होकर।
कभी चौकीदार, कभी सुरक्षाकर्मी, कभी पुलिस, कभी कलेक्टर।
हर पद पर नजर आता है
आप सभी जानते हैं
उसे,
वह है पिता।

सुनिता परसाई (होशंगाबाद)

प्रेषक-
जितेन्द्र शिवहरे
177, इंदिरा एकता नगर पूर्व रिंग रोड चौराहा मुसाखेड़ी इंदौर मध्यप्रदेश मोबाइल नम्बर
8770870151
[email protected]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *