■ हिन्दी पत्रकारिता दिवस को अर्पित सात चौपदा
■ धीरेन्द्र श्रीवास्तव ( धीरु भाई )
——– 1 ——-
पुनः समय का सर्वे करने निकले हैं नवरत्न।
गांव के मुखिया कल्लू जी हैं लल्लू जी से प्रश्न।
उत्तर सभी से अच्छा।
बता दो सबको बच्चा।
——— 2 ——-
बता रहे खुद बीमारी से केवल कल्लू जूझा।
लल्लू रहा ट्वीट में उलझा आग में कल्लू कूदा।
लगोंटा नया जल गया।
करोना देख डर गया।
——– 3 ——–
सुई दवा सभी के घर में अस्पताल भए खाली।
जनता खुश हो मना रही है घाटों पर दीवाली।
दुखी हैं सिर्फ विरोधी।
कामी क्रोधी लोभी।
——— 4 ——-
मियां के घर का तेल छू रहा केवल सौ का डोर।
हिन्दू वाली सरसो पहुंचीं अब दो सौ की ओर।
बोल चाहत की जय जय।
बोल साहब की जय जय।
——– 5 ——–
थोड़ी थोड़ी कमी के कारण गड़बड़ सूबेदार।
केवल इनको बदल के देखो फिर होगी जयकार।
करा दो बन्द रुहफ़ज़ा।
स्वर्ग पर कर लो कब्जा।
——– 6 ——
नदी के तट पर लाश बिछी है सागर में तूफान।
इसीलिए है बहुत जरुरी सुन्दर नया मकान।
चीन लख गल जाएगा।
पाक लख जल जाएगा।
——– 7 ——-
जो भी जय जय कहता उसको कहकर पत्तलकार।
धीरु भाई मना रहे हैं कलमों का त्योहार।
बोल जय मार्तण्ड की।
भरत भारत अखण्ड की।
30 मई 2021