“जबरदस्ती का मेहमान”
(किशोर कुमार धनावत)
“बिदाई”
रुकेंगे कैसे,
समय हो गया है,
चलना होगा।
देखने लगा,
पालकी आ गयी,
बुलावा पक्का।
जल्दी करोना,
शोरगुल मचा है,
लोगों की भीड़।
सब तैयार,
देरी किस बात की,
काम हो गया।
दुल्हा कहाँ है,
प्रेमिका के पास,
जान अटकी।
आवाज आई,
राम नाम सत्य है,
जाना पड़ेगा।
हाथ पकड़े,
बैठ गये हैं दोनों,
संग में चले।
फूल बरसे,
गगन मुस्कुराया,
देव हरसे।
🙏🌹🙏🌹🙏
५-५-२०२१
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“खाली हाथ”
आपदा का अवसर है,
फायदा छोड़दें।
सेवा के कारक बनें,
अहंकार तोड़दें।
मन में प्रतिज्ञा करें,
काम शुरू किजिए।
जितना भी हो सके,
सहयोग किजिए।
आपदा में घिरे लोग,
अपना हाथ बढ़ाईये।
जाना तो सबको है,
अभी साथ निभाईये।
कौन जाने किसीका,
बुलावा आजायेगा।
कुछ जाने का नहीं,
सब यहीं रह जायेगा।
अच्छा शुभरात्री,
🙏🌹🙏🌹🙏
(३-५-२०२१)
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“उम्मीद”
मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा,
सारे तेरे घर में हैं।
वो रहता तेरे साथ में,
और तूं उसकी नजर में है।
सहारा बन मजबूरों का,
बुझते चिरागों को जला।
मुरादें पूरी कर भूखे की,
जो जहां जैसे भी मिला।
दो रोटियां जब दोगे उसे,
गड़ा खजाना मिल जायेगा।
मायुस को मिलेगी राहत,
चेहरा उसका खिल जायेगा।
एक बात याद रखना,
उम्मीदों की अनेकों किरणें,
पूरे नभमंडल में छायी है।
मेरी, तुम्हारी, सबकी आशा,
उसकी रोशनी में समायी है।
बरसेगा बादल जरूर,
एकदिन बौछार बनकर।
आयेंगे खुशीयों के दिन,
हरपल त्योहार बनकर।
२-५-२०२१
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“जबरदस्ती का मेहमान”
अनजाना जब आने को हो,
पहले उसको जांचो परखो।
चिपक जायेगा वो कुछ ऐसे,
सफाई में लगेंगे बरस- बरसों।
एक मेहमान ऐसा आया,
घर का मालिक बन गया।
लोगों ने उसे गले लगाया,
अब उसका सीना तन गया।
जाने का वो नाम ही न लेता,
ज्यादा करो तो जान ले लेता।
हे प्रभो अब करदो बेड़ा पार,
दुखीत हो गया सारा संसार।
🙏🌹🙏🌹🙏
१-५-२०२१
रचनाकार:-किशोर कुमार धनावत,
रायपुर (छ.ग.)

